Bokaro News: चास, प्रतिनिधि। जमीन और मकान की रजिस्ट्री कराने में बढ़ते खर्च को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। रजिस्ट्री कराने पहुंचे कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन पर करीब 10 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च का बोझ डाला जा रहा है, जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए जमीन खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टांप शुल्क और कोर्ट फीस के रूप में बड़ी राशि देनी पड़ती है, ऐसे में अतिरिक्त खर्च उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा रहा है।
नाराज लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कथित अतिरिक्त बोझ को समाप्त नहीं किया गया तो वे निबंधन कार्य का बहिष्कार कर आंदोलन शुरू करेंगे। लोक विकास मोर्चा के संजय गोस्वामी ने भी इस मुद्दे को उपायुक्त और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने तथा आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
इधर, अंचल कार्यालय में पंजी-टू अपडेट नहीं होने से भी रजिस्ट्री कार्य प्रभावित हो रहा है। जमीन की रजिस्ट्री के दौरान पंजी-टू का मिलान अनिवार्य है, लेकिन इसके अपडेट और सत्यापन में देरी होने से कई मामलों में रजिस्ट्री लंबित हो रही है। बताया जा रहा है कि अंचल कार्यालय से पंजी-टू मेल होने में करीब दस दिन का समय लग रहा है, जिससे जमीन खरीद-बिक्री का काम प्रभावित हो रहा है। इसका असर उन लोगों पर भी पड़ रहा है जो बीमारी, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे जरूरी कार्यों के लिए जमीन बेचना चाहते हैं।
जिला अवर निबंधन पदाधिकारी दीपिका कुमारी ने कहा कि रजिस्ट्री के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है। उन्होंने लोगों से किसी भी शिकायत की स्थिति में सीधे कार्यालय से संपर्क करने की अपील की। उनका कहना है कि कई मामलों में बिचौलियों द्वारा गलत जानकारी देकर लोगों से अधिक राशि की मांग की जाती है, जबकि विभाग की ओर से कोई अतिरिक्त शुल्क निर्धारित नहीं है。
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