आउटसोर्सिंग के कार्य से जुड़े राजेश यादव की हत्या की साजिश रची गई थी। पुलिस ने हत्या की फिराक में लगे शूटर पुटकी करकेंद खटाल निवासी मोनू कुमार यादव को विदेशी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। गुरुवार को उसे जेल भेज दिया गया। उसने बताया कि वह ईस्ट बसुरिया निवासी चिरकुट संजय के साथ मिलकर राजेश यादव की हत्या की योजना बना रहा था। मौके से फरार संजय की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर प्रकाश सोय ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए मोनू की गिरफ्तारी की जानकारी दी। डीएसपी ने बताया कि पुलिस को 15 जुलाई की शाम गुप्त सूचना मिली थी कि हीरक रोड आठ लेन सड़क के पास घुंघूटांड़ स्थित एक सुनसान जगह पर एक पुराने बंद मकान के पास दो अपराधी हथियार के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही एसएसपी प्रभात कुमार ने विशेष छापेमारी दल का गठन किया। टीम ने उस जगह पर दबिश दी। भागने के दौरान मोनू गिर गया और उसे पुलिस ने पकड़ लिया। उसकी जींस पैंट की बाईं तरफ कमर में खोंसा हुआ एक लोडेड पिस्टल बरामद हुआ। हथियार की जांच करने पर मैगजीन से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। बरामद पिस्टल पर मेड इन यूएसए लिखा हुआ है। मोनू यादव का आपराधिक इतिहास है। वह वर्ष 2025 में पुटकी थाना में आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। छापेमारी टीम एसआई सोहन कुमार साहू, महिला एसआई जोसफिना हेम्ब्रम, एएसआई हरि प्रकाश मिश्रा, आरक्षी संटु मांझी, संतोष कुमार और दीपक कुमार आदि शामिल थे。
राजू, नीतीश और नुनू ने राजेश को मारने के लिए दिया था हथियार
पुलिस जांच में पता चला कि आउटसोर्सिंग कंपनी की लाइजनिंग के दौरान राजेश यादव का दूसरे गुट से विवाद हो गया। पूर्व में सभी एक साथ काम करते थे, लेकिन कुछ महीनों से बसुरिया यादव बस्ती निवासी राजू यादव और नीतीश यादव तथा गोंदूडीह ग्वाला बस्ती निवासी नुनू यादव से राजेश यादव का विवाद चल रहा था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने मिल कर राजेश की हत्या की योजना बनाई। तीनों ने पांच-छह दिन पहले मोनू को एक पिस्टल और गोलियां दीं। वही पिस्टल लेकर मोनू और ईस्ट बसुरिया का चिरकुट संजय मिल कर हत्या की प्लानिंग कर रहे थे, इसी बीच वहां पुलिस पहुंची और मोनू को दबोच लिया। अंधेरे का फायदा उठा कर संजय भाग गया।
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शॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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