कृष्ण बिहारी नूर के काव्य-समग्र ‘मन मुर्शिद’ का लोकार्पण – Hindustan

नई दिल्ली। उर्दू घर स्थित सैयदना सैफुद्दीन ऑडिटोरियम में अपनी विशिष्ट काव्य-शैली के लिए प्रसिद्ध शायर कृष्ण बिहारी नूर के काव्य-समग्र ‘मन मुर्शिद’ का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर उर्दू और हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों ने कृष्ण बिहारी नूर की काव्यगत विशेषताओं, वैचारिक गहराई और रचनात्मक महत्व पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उल्लेखनीय है कि इस काव्य-संकलन का संपादन प्रसिद्ध शायर एवं साहित्यकार मोईन शादाब ने किया है। इसका प्रकाशन संस्था इबारत पब्लिकेशन ने किया है। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध हिंदी कवि और गीतकार बाल स्वरूप राही ने की। उन्होंने कृष्ण बिहारी नूर से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए उनके साहित्यिक और रचनात्मक योगदान पर प्रकाश डाला। कृष्ण बिहारी नूर के पुत्र कुंवर अरुण कुमार ने अपने पिता की साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए संपादक मोईन शादाब और प्रकाशक सलाम खान के प्रयासों की सराहना की तथा दिवंगत पिता को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की。
इस अवसर पर प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि जिस प्रकार ब्रज नारायण चकबस्त, रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ और कुंवर महेंद्र सिंह बेदी ‘सहर’ के बिना उर्दू भाषा की परिकल्पना अधूरी है, उसी प्रकार कृष्ण बिहारी नूर के बिना भी उर्दू भाषा पूर्ण नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जैसे अमीर ख़ुसरो हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के जनक माने जाते हैं, उसी प्रकार कृष्ण बिहारी नूर ने भी इन दोनों भाषाओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया।
प्रोफेसर शहपर रसूल ने कहा कि कृष्ण बिहारी नूर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे सहज और प्रभावशाली शैली में शेर कहते थे। उनकी शायरी जीवन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रेरणा देती है। मंसूर उस्मानी ने उन्हें दरवेश-स्वभाव का शायर बताते हुए कहा कि उनकी शायरी में तग़ज़्ज़ुल और तसव्वुफ़ साथ-साथ चलते हैं। खलीलुर्रहमान एडवोकेट ने कृष्ण बिहारी नूर की शब्द-संपदा और हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रयोग पर एक गंभीर और विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
प्रोफेसर अख़लाक़ आहन ने कहा कि ‘मन मुर्शिद’ एक अत्यंत अर्थपूर्ण शीर्षक है, जो कवि के व्यक्तित्व और काव्य-दृष्टि दोनों के अनुरूप है। हक़्क़ानी अल-क़ासमी ने कहा कि कृष्ण बिहारी नूर अपनी संवेदना, अभिव्यक्ति और रचनात्मक विरासत के माध्यम से सदैव जीवित रहेंगे और उनका यह संकलन ‘मन मुर्शिद’ कल्पनाशीलता का एक ताजमहल है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शफ़ी अय्यूब ने किया। उन्होंने कृष्ण बिहारी नूर के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों को रेखांकित करते हुए कहा कि वे लखनवी तहज़ीब के प्रतिनिधि शायर और मुशायरों की जान थे।
पुस्तक के संपादक मोईन शादाब ने समग्र मन मुर्शिद के संपादन और संकलन-प्रक्रिया के विभिन्न चरणों तथा उससे जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण बिहारी नूर की शायरी प्रेम, मानवता, सांस्कृतिक चेतना और भाषा की कोमलता का सुंदर संगम है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। इबारत पब्लिकेशन के संस्थापक सलामुद्दीन ख़ान ने स्वागत भाषण में कहा कि ‘मन मुर्शिद’ का प्रकाशन कृष्ण बिहारी नूर की साहित्यिक सेवाओं को समर्पित एक गरिमामय श्रद्धांजलि है।
समारोह में कृष्ण बिहारी नूर के शिष्य डॉ. कृष्ण कुमार नाज़, दीपक जैन और अरविंद असर भी उपस्थित थे। परिवार की ओर से उनके बेटी कुंवर अरुण कुमार के अलावा बेटी नीरा श्रीवास्तव, दामाद राकेश श्रीवास्तव, बहू रश्मि श्रीवास्तव और पौत्री सुगंधा ने विशेष रूप से भाग लिया। इस अवसर पर अमेरिका के ह्यूस्टन में रहने वाले कवि-लेखक अदील ज़ैदी और प्रसिद्ध शायर अब्बास ताबिश के ऑडियो और वीडियो संदेश भी सुनाए गए।
लोकार्पण के बाद कृष्ण बिहारी नूर की स्मृति में ‘ध्यान में गुम था’ शीर्षक से एक मुशायरा भी आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर सलीम शीराज़ी ने की। संचालन मोईन शादाब ने किया। मुशायरे में बाल स्वरूप राही, प्रोफेसर शहपर रसूल, मंसूर उस्मानी, मंगल नसीम, डॉ. कृष्ण कुमार नाज़, दीक्षित डनकौरी, दीपक जैन, अरविंद असर, प्रोफेसर रहमान मुसव्विर, अख्तर आज़मी, अनस फैज़ी, असरार राज़ी, नादिम नदीम, खुशबू सक्सेना, गायत्री मेहता और शारिका मलिक सहित अनेक शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस मुशायरे का आयोजन ड्रीम्स इंडिया रिसर्च फाउंडेशन ने उर्दू अकादमी, दिल्ली के सहयोग से किया था।
इस अवसर पर दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और साहित्य-प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। इनमें डॉ. अरजुमंद आरा, रमन हितकारी, राजमणि श्रीवास्तव, अजय अज्ञात, समीर देहलवी, सुहैल अंजुम, नासिर अज़ीज़ एडवोकेट, डॉ. मुनव्वर हसन कमाल, डॉ. वसीम राशिद, रुख़संदा रूही, डॉ. इब्राहीम अफ़सर, मोहम्मद तकी, मसऊद हाशिम, साद अख़्तर, याक़ूब चश्मे वाले, उज़ैर कुद्दूसी, मोहम्मद हारून, मोहम्मद साजिद, जावेद रहमानी, डॉ. सदफ़ फ़ातिमा, शाहिद हबीब, मालिक अश्तर, फ़रीद अहमद, आसिया ख़ान, ज़रीन सिद्दीकी, वसीम ख़ान, सैयद वजाहत मज़हर, शाकिर देहलवी, शाहरुख़ अबीर, आरिफ़ देहलवी, गोल्डी ग़ज़ब, मलिक रिज़वान, जावेद आलम, शहज़ाद अली, वसीम अहमद, आसिफ़ अलवी और रफ़ीउल्लाह सहित अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल थीं।
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