ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी राजनीति विज्ञान विभाग और डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को “खाड़ी संकट और भारतीय विदेश नीति” विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने खाड़ी क्षेत्र की बदलती परिस्
खाड़ी संकट में भारत के सामने कई चुनौतियां – प्रो. झा
मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसएम झा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र अभी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में खाड़ी देशों में बड़ा संघर्ष होता है तो भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता में अहम भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए सभी देशों के साथ संतुलित संबंध कायम रखने होंगे। प्रो. झा ने चीन की विदेश नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन ने खाड़ी संकटों में सीधे हस्तक्षेप से बचते हुए आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाया है।
ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार पर पड़ सकता है असर
सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे पीजी राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष ने कहा कि खाड़ी संकट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाद की कीमतों, महंगाई, रक्षा उपकरणों की उपलब्धता और रोजगार पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि करीब एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। इनसे मिलने वाली रेमिटेंस भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए भारत के लिए खाड़ी देशों के साथ मजबूत और मधुर संबंध बनाए रखना जरूरी है।
रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत करने पर जोर
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि हर देश को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने भारत के ऊर्जा हितों को देखते हुए ईरान, रूस और वेनेजुएला जैसे देशों के साथ व्यावहारिक व्यापारिक संबंध बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
शिक्षकों और शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में डॉ. रघुबीर रंजन ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। शोध छात्र नितीश नायक ने मंच संचालन किया। मौके पर डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. मनोज कुमार, अनिल कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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