बांग्लादेश सरकार ने दो ऐसे पत्रकारों को भारत में मीडिया संबंधी उच्च पदों पर नियुक्त कर दिया है, जिनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स भारत-विरोधी बताए जा रहे हैं। इस फैसले ने न केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई चुनौती दी है, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। बांग्लादेश ने वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद सैदुर रहमान को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन में मिनिस्टर (प्रेस) के पद पर और टीवी पत्रकार उम्मे मारूफा को कोलकाता स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन में फर्स्ट सेक्रेटरी (प्रेस) पद के लिए नामित किया है। दोनों नियुक्तियां बांग्लादेश के लोक प्रशासन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत हुई हैं।
मोहम्मद सैदुर रहमान बंगाली दैनिक ‘इत्तेफाक’ के वरिष्ठ पत्रकार हैं। ढाका विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन एवं जर्नलिज्म में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी पत्रकारिता यात्रा ‘दैनिक डिंकल’ से शुरू की। जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद उन्हें इत्तेफाक में राजनीति और चुनाव संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई। वे ढाका विश्वविद्यालय जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और रिपोर्टर्स फोरम फॉर इलेक्शन एंड डेमोक्रेसी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बांग्लादेश सरकार ने उन्हें एक वर्ष के लिए नई दिल्ली में प्रेस मिनिस्टर नियुक्त किया है और आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पद संभालने से पहले उन्हें अपने सभी पेशेवर दायित्व, व्यापारिक हित और अन्य संगठनों में पद छोड़ने होंगे।
उम्मे मारूफा
उम्मे मारूफा न्यूज24 टीवी चैनल की स्पेशल रिपोर्टर हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें कोलकाता में फर्स्ट सेक्रेटरी (प्रेस) का पद दिया जा रहा है।
इन नियुक्तियों का सबसे बड़ा विवाद दोनों पत्रकारों के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर है। दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1971 के मुक्ति संग्राम में भारतीय सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए ‘ऐतिहासिक विजय दिवस’ का जिक्र किया था। सैदुर रहमान ने फेसबुक पर जवाब देते हुए लिखा था कि एक बांग्लादेशी होने के नाते मैं साफ कह रहा हूं कि 1971 हमारी आजादी की लड़ाई थी। इस दौरान उन्होंने भारत की भूमिका को ‘जल्दबाजी’ करार दिया और दावा किया कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश को भारत की ‘कॉलोनियल पकड़’ से पूरी आजादी मिली। उन्होंने 2009 के बीडीआर विद्रोह में भारत का हाथ बताने, शेख हसीना सरकार पर आरोप लगाने और जियाउर रहमान की हत्या में भारत की संलिप्तता का जिक्र भी किया था।
वहीं, उम्मे मारूफा पर भी इसी तरह के आरोप हैं। उन्होंने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के ‘सेवन सिस्टर्स’ वाले बयान को शेयर किया था, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर संवेदनशील टिप्पणी की गई थी। इसके अलावा भारत-विरोधी विचारधारा वाले कुछ संगठनों से जुड़े पोस्ट्स भी उनके अकाउंट से जुड़े बताए जा रहे हैं।
विवाद बढ़ने के बाद दोनों के कई विवादास्पद पोस्ट या तो डिलीट कर दिए गए हैं या अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। भारतीय डिप्लोमैटिक और मीडिया सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियों पर सवाल उठने के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि, डिलीट करने भर से पुराने विचारों और बयानों पर उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते।
भारत में विदेश मंत्रालय के करियर डिप्लोमैट्स प्रेस पद संभालते हैं, लेकिन बांग्लादेश में ये पद अक्सर राजनीतिक नियुक्तियों से भरे जाते हैं। पिछले प्रवक्ता फैसल महमूद को भी भारत की घरेलू राजनीति पर टिप्पणियों के कारण भारत सरकार की नाराजगी झेलनी पड़ी थी और फरवरी में उनका अनुबंध रद्द कर दिया गया था।
जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अभी भी नाजुक दौर चल रहा है। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद संबंध सुधारने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन ऐसी नियुक्तियां न केवल विश्वास की कमी दिखाती हैं, बल्कि भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग को भी प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अभी तक बांग्लादेश सरकार ने इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय भी मामले पर चुप्पी साधे हुए है, हालांकि सूत्रों के मुताबिक डिप्लोमैटिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।
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देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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