ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नए, सुरक्षित समुद्री मार्ग पर बातचीत के अंतिम चरण में हैं, जिसका उद्देश्य पश्चिमी एशिया में तनाव के बीच जहाजों …और पढ़ें
ईरान-ओमान होर्मुज में सुरक्षित नए समुद्री मार्ग पर सहमत
भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल कंपनियों की लागत घटेगी
तकनीकी रूप से संभव मध्य मार्ग, जहाजों की आवाजाही व्यवस्थित
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया और सुरक्षित शिपिंग रूट तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देश ऐसे समुद्री मार्ग पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो न तो ईरान के तट से सटे मौजूदा उत्तरी मार्ग पर होगा और न ही ओमान के दक्षिणी मार्ग पर। प्रस्तावित रास्ता दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करते हुए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार भी करीबी नजर बनाए हुए है। भारत के अधिकारी ईरान और ओमान, दोनों के संपर्क में हैं और वार्ता की प्रगति पर लगातार नजर रख रहे हैं। हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से भारत के तेल और गैस आयात पर भी असर पड़ा था।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत पहले यह देखेगा कि दोनों देशों के बीच बातचीत किस नतीजे पर पहुंचती है। इसके बाद नए समुद्री मार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और व्यावहारिक उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
जानकारों के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग स्ट्रेट के मध्य हिस्से में या दोनों देशों के क्षेत्रीय जल के बीच ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जहाजों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और दोनों देशों की निगरानी व नियंत्रण की भूमिका भी बनी रहेगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना तकनीकी रूप से संभव है। होर्मुज स्ट्रेट की चौड़ाई लगभग 21 से 33 समुद्री मील (लगभग 61 किमी) है, इसलिए बीच में सुरक्षित समुद्री गलियारा विकसित किया जा सकता है। फिलहाल दोनों देश संयुक्त कार्य समूह के जरिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि नए रूट से खाड़ी देशों और भारतीय बंदरगाहों के बीच कुल समुद्री दूरी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, क्योंकि स्ट्रेट का हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है और अधिकांश यात्रा अरब सागर में होती है।
भारत का ईरान और ओमान के साथ संबंध
यदि नया मार्ग दोनों देशों की सहमति से सुरक्षित रूप से लागू होता है, तो जहाजों पर हमलों और नियंत्रण संबंधी विवादों का जोखिम कम होगा। इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर रहेगी और भारतीय तेल कंपनियों के लिए बीमा तथा मालभाड़े की लागत में भी कमी आ सकती है। भारत के ईरान और ओमान, दोनों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईरान बोला- नया रूट अलग, होर्मुज खोलने का सवाल अलग
ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर सहमति बनने का यह मतलब नहीं है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह खोल दिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यह समझौता केवल सुरक्षित जहाज संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियों, नौसैनिक नाकेबंदी और क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज की स्थिति प्रभावित हुई है।
बघाई ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों पर किसी भी बाहरी दबाव या धमकी का असर नहीं पड़ने देगा। उनके अनुसार, ओमान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना एक अलग मुद्दा है।