सूरज को हम अक्सर आग का एक विशाल गोला समझते हैं, लेकिन उसकी सतह पर हर पल कुछ ऐसा हो रहा है जिसे इंसान ने अब तक देखा ही नहीं थाय वैज्ञानिकों ने सूरज की सतह पर बेहद छोटे-छोटे प्लाज्मा के भंवर खोजे हैं. इनमें कुछ भंवर महज 20 किलोमीटर चौड़े हैं. इतनी छोटी संरचनाओं को देख पाना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी उपलब्धि है. यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भंवर सूरज के चुंबकीय क्षेत्र को घुमाने, ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और छोटी सौर विस्फोटक घटनाओं को समझने में मदद कर सकते हैं. यह अध्ययन अमेरिका के नेशनल सोलर ऑब्जर्वेटरी, जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च और हाई अल्टीट्यूड ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है.
इन भंवरों को देखने के लिए वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे बड़ी सौर दूरबीनों में से एक डैनियल के. इनौये सोलर टेलीस्कोप से बेहद उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लीं. इसके बाद इन तस्वीरों की तुलना अत्याधुनिक कंप्यूटर सिमुलेशन से की गई. वैज्ञानिकों ने सूरज की सतह पर मौजूद ग्रैन्यूल्स के किनारों पर ये भंवर देखे. ग्रैन्यूल्स सूरज की सतह पर मौजूद विशाल, लगातार बदलते क्षेत्र हैं, जो उबलते पानी के बुलबुलों जैसे दिखाई देते हैं. इनका आकार आमतौर पर 500 से 2,000 किलोमीटर तक होता है. इनके किनारों पर वैज्ञानिकों को पहली बार बेहद पतली, लहरदार संरचनाएं दिखाई दीं, जिनमें घूमने वाली गति मौजूद थी.
इंफोग्राफिक/notebooklm
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन भंवरों का संबंध केल्विन-हेल्महोल्ट्ज अस्थिरता से है. आसान भाषा में समझें तो जब दो प्लाज्मा धाराएं एक-दूसरे के पास अलग-अलग गति से बहती हैं, तो उनके बीच घर्षण जैसी स्थिति पैदा होती है. इससे छोटी-छोटी लहरें बनने लगती हैं और आगे चलकर वे भंवर का रूप ले सकती हैं. ऐसी घटनाएं पृथ्वी के समुद्र और बादलों से लेकर बृहस्पति और शनि के वातावरण तक देखी जाती हैं. सूरज पर इन भंवरों का लगातार बनना इसलिए खास है क्योंकि ये उसके शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ भी संपर्क कर सकते हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये छोटे भंवर सूरज के चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं को घुमा और मोड़ सकते हैं. इससे चुंबकीय ऊर्जा धीरे-धीरे जमा हो सकती है. जब यह ऊर्जा अस्थिर हो जाती है, तो मैग्नेटिक रिकनेक्शन के जरिए अचानक बाहर निकल सकती है. इससे नैनोफ्लेयर जैसी छोटी सौर विस्फोटक घटनाओं को समझने में मदद मिल सकती है. इतना ही नहीं, ये भंवर चुंबकीय और गैर-चुंबकीय प्लाज्मा को तेजी से मिला सकते हैं. इससे चुंबकीय क्षेत्र सूरज की सतह से उसके ऊपरी वातावरण तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंच सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया सूरज के लगभग 11 साल के चुंबकीय चक्र को समझने में भी अहम भूमिका निभा सकती है. यानी सूरज पर दिखे ये बेहद छोटे भंवर, हमारे तारे के बड़े रहस्यों की चाबी साबित हो सकते हैं. (Source: Max Planck Institute for Solar System Research)
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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
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