नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। मध्य जिला साइबर पुलिस ने चोरी और झपटे हुए मोबाइल नंबर पर सक्रिय यूपीआई से रुपये निकालने से जुड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बैंक खाते मुहैया कराने और रुपयों को अलग-अलग माध्यम से निकालने में लिप्त नौ लोगों को गिरफ्तार किया है।
डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि पटेल नगर निवासी बुजुर्ग ने मई माह में शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, उनका मोबाइल फोन 20 मई को चोरी हो गया था इसलिए उन्होंने दो-तीन दिन बाद दूसरा सिम कार्ड जारी कराया। उन्हें नये सिम कार्ड के मोबाइल में लगाते ही बैंक से 70 हजार रुपये निकलने का एसएमएस मिला। इस पर पीड़ित ने साइबर थाने में ठगी की एफआईआर दर्ज कराई।
डीसीपी ने बताया कि पीड़ित के बैंक खाते से रुपये निकालकर अलग-अलग बैंक खातों में जमा किया गया था। फिर इन बैंक खातों से अलग-अलग तरीके से रुपये निकाले गये थे। इस जानकारी के आधार पर एसीपी पहाड़गंज सौरभ ए नरेंद्र की देखरेख में एसएचओ योगराज दलाल की एक टीम ने मेरठ-गाजियाबाद और दूसरी टीम ने जयपुर में कॉल सेंटर पर छापा मारा।
पुलिस ने दोनों जगहों से नौ लोगों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 52 मोबाइल, 145 सिम कार्ड, 70 डेबिट कार्ड, चार lakh नगद और छह पीओएस मशीनें बरामद कीं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मेरठ-गाजियाबाद से गिरफ्तार अमर, हर्ष, मोहन और वासु बैंक खाता मुहैया कराते थे। वहीं जयपुर स्थित काल सेंटर का मालिक निखिल और संचालक अभिषेक झा, प्रिंस, आनंद और बिशेक कुमार को दबोचा। ये लोग बैंक खातों में रुपये को जमा करते थे और पीओएस एवं डेबिट कार्ड से रुपये निकालते थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरोह को चोरी या झपटे हुए मोबाइल फोन पर सक्रिय यूपीआई से रुपये निकालने वालों की तलाश की जा रही है। पोर्टल पर दर्ज 13 शिकायतें इन बैंक खातों से जुड़ी पाई गई हैं।
शॉर्ट बायो : हेमंत कुमार पांडेय वर्ष 2009 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में हिंदुस्तान अखबार के दिल्ली संस्करण में क्राइम, कानून एवं राजनीतिक-सामाजिक विषयों से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
हेमंत कुमार पांडेय राजधानी दिल्ली की क्राइम रिपोर्टिंग में स्थापित नाम हैं। वह वर्ष 2009 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह वर्ष 2013 से हिंदु्स्तान दिल्ली टीम का हिस्सा हैं। इस दौरान अपराध के बदलते ट्रेंड पर भी मजबूत पकड़ रखते हैं। खासतौर पर आर्थिक अपराध और साइबर अपराध। उन्होंने वर्ष 2017 से साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों पर रिपोर्टिंग किया है। इस बीते दस सालों में क्राइम की कई बड़ी ब्रेकिंग की जिसमें बुराड़ी में बसपा नेता समेत छह की हत्या, श्रद्धा वाल्कर मर्डर केस, एआई के इस्तेमाल सुलझा हत्या का मामला और महिला कांस्टेबल का दो साल बाद मिला कंकाल आदि खबरें प्रमुख हैं।
करियर का सफर
हेमंत ने करियर की शुरुआत में प्रथम प्रवक्ता मैगजीन के लिए रिपोर्टिंग की। फिर वर्ष 2009 में डीएलए नाम के सांध्य कालीन अखबार से करियर की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष वह 2011 में न्यूज एजेंसी आईएएनएस की टीम का हिस्सा बने। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं समसामयिकी मुद्दों से जुड़ी खबरों का अनुवाद करने का अनुभव मिला। फिर वर्ष 2013 जनवरी में दैनिक भाष्कर की दिल्ली और अक्तूबर में हिंदुस्तान दिल्ली टीम का हिस्सा बने।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मेडिकल रिपोर्टिंग
हेमंत ने B.Sc (बायोलॉजी) के बीएड एवं मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा की डिग्री ली। इस दौरान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान इतिहास, भूगोल, अर्थ व्यवस्था, समसामयिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों और सामाजिक समस्याओं को लेकर एक समझ विकसित हुई। क्राइम रिपोर्टिंग के दौरान इससे सहायता मिली।
क्राइम रिपोर्टिंग एवं इसके आयाम
हेमंत की क्राइम रिपोर्टिंग के विभिन्न पक्षों पर गहरी पकड़ है। खासतौर पर कानून के प्रति समझ एवं पुलिस विभाग में अंदर तक पैठ है जिसकी वजह से एक्सक्लूसिव खबरें सही तथ्यों के साथ निकालकर पाठकों के लिए लाते हैं। हेमंत की रिपोर्टिंग सही और सटीक तथ्यों पर टिकी है।
विशेषज्ञता
साइबर क्राइम, आर्थिक अपराध, गैंगवार
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