आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर सह सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज के फाउंडिंग हेड प्रो. विनोद तारे ने शुक्रवार को आईआईटी धनबाद में कहा कि देश की प्रमुख नदियों के कायाकल्प की शुरुआत स्थानीय जल स्रोतों और वाटर बॉडीज को बेहतर बनाने से होनी चाहिए। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और महानदी जैसी नदियों में प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय वाटर सिस्टम्स, ड्रेन्स और छोटी धाराओं के जरिए पहुंचता है। ऐसे में स्थानीय वाटर सिस्टम्स को मजबूत करना डाउनस्ट्रीम रिवर्स की इकोलॉजिकल हेल्थ सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है। आईआईटी धनबाद के सेंचुरी लेक्चर सीरीज और मिशन लाइफ के तहत गुरुवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया।
आयोजन को आईआईटी कानपुर के डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर प्रो. विनोद तारे ने संबोधित किया। लोकल वाटर सिस्टम्स ऐज इकोलॉजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर थ्रू रीइमैजिनिंग वेस्टवॉटर रीयूज इन इंडिया: पाथवे फॉर सस्टेनेबल रिवर रिजुवेनेशन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वेस्टवॉटर रीयूज के लिए एक जैसी स्ट्रैटेजी अपनाने के बजाय लोकल कंडीशंस के आधार पर समाधान तैयार करने पर जोर दिया। प्रो. तारे ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्निकल फीजिबिलिटी, जरूरत और इकोनॉमिक वायबिलिटी को ध्यान में रखकर वेस्टवॉटर रीयूज की योजना बननी चाहिए। यदि किसी रीयूज सिस्टम में लागत बहुत अधिक आती है या नुकसान ज्यादा होता है, तो वह समाधान बेहतर विकल्प नहीं हो सकता। प्रो. तारे ने यूजी, पीजी व शोध छात्रों के साथ संवाद किया। प्रो. सुनील कुमार गुप्ता डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग ने लोकल टू रिवर अप्रोच के जरिए भारत में सस्टेनेबल रिवर रिजुवेनेशन की दिशा में स्थानीय वाटर सिस्टम्स को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया।
शॉर्ट बायो: अमित वत्स पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा का कवरेज कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
अमित वत्स पत्रकारिता जगत में जाना पहचाना नाम हैं। पत्रकारिता में 23 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण में एजुकेशन व रोजगार से जुड़े बीट की रिपोर्टिंग करते हैं। एजुकेशन बीट पर मजबूत पकड़ है।
करियर का सफर
अमित ने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण से की। बहुत ही कम समय में प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। प्रारंभिक वर्षों में ही एजुकेशन बीट पर पकड़ बनाई। वर्ष 2009 में हिन्दुस्तान से जुड़े। उसके बाद पिछले 16 वर्षों से हिन्दुस्तान में शिक्षा समेत अन्य बीट का नेतृत्व कर रहे हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए भी लगातार खबरें लिख रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्टभूमि और एजुकेशन रिपोर्टिंग
बीएड, एमए एजुकेशन के साथ ही मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई का लाभ अमित को एजुकेशन बीट की रिपोर्टिंग में मिला। इसकारण एजुकेशन बीट पर कमांड होने के साथ ही आईआईटी धनबाद, यूनिवर्सिटी शोध की खबरें, वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने व एक्सक्लूसिव स्टोरी लिखते हैं।
शिक्षा और रोजगार
शिक्षा को सीधे आर्थिक अवसरों और रोजगार से जोड़ने पर केंद्रित विश्लेषण समेत अन्य एक्सक्लूसिव खबरें लिखी है। शिक्षा से संबंधित खबरों पर अमित की गहरी समझ है। अमित का मानना है कि तथ्य आधारित व विश्वसनीयता पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है। पाठकों को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए। रिपोर्टिंग में विशेषकर छात्र केन्द्रित दृष्टिकोण जरूरी है।
विशेषज्ञता
– नई शिक्षा नीति कैसे बदल रही है
– प्रतियोगिता परीक्षाओं के अपडेट
– छात्रों के लिए तनावमुक्त तैयारी
– बोर्ड परीक्षाओं जैक, सीबीएसई, आईसीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया व रिजल्ट का विश्लेषण
– कौशल विकास आधारित शिक्षा
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