1947 में आजादी के समय दक्कन की सबसे महत्वपूर्ण कोल्हापुर रियासत का विलय कई चुनौतियों से भरा रहा। आइए जानते हैं कि आखिर क्या चुनौतियां थी और कैसे हुआ था विलय?
कोल्हापुर रियासत का भारत में विलय का इतिहास।
14 अगस्त 1947 को आंशिक विलय समझौता हुआ।
कोल्हापुर के भविष्य पर दो अलग विचार थे।
गांधीजी की हत्या के बाद दंगे विलय का मोड़ बने।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जब 1947 में देश आजाद हुआ, तब भारत में करीब 565 रियासतें थीं। इनमें से अधिकांश रियासतें सरदार वल्लभभाई पटेल और वीपी मेनन की सूझबूझ से 15 अगस्त 1947 से पहले ही भारत में शामिल हो चुकी थीं। लेकिन, दक्कन (दक्षिण भारत) की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रियासत कोल्हापुर का विलय थोड़ा अलग और चुनौतीपूर्ण रहा।
इस बात को ऐसे समझिए कि छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू महारानी ताराबाई द्वारा स्थापित कोल्हापुर रियासत का इतिहास बहुत गौरवशाली था। 14 अगस्त 1947 को इस रियासत ने शुरुआती तौर पर सिर्फ तीन विषयों रक्षा, विदेश मामलों और संचार पर भारत में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन पूर्ण विलय पर बातचीत अभी बाकी थी।
इस बात को ऐसे समझिए कि कोल्हापुर के भविष्य को लेकर स्थानीय स्तर पर दो मुख्य धाराएं थीं। पहली सोच थी कि प्रजाराष्ट्रीय नेता माधवराव बागल के नेतृत्व में एक पक्ष का मानना था कि कोल्हापुर का इतिहास बहुत महान है, इसलिए इसे अपनी स्वायत्तता (आजादी) बनाए रखनी चाहिए। बाद में बागल ने इसे ‘गलत तरीकों से हुआ विलय’ भी बताया था।
बात अब अगर दूसरी सोच की करें तो लोगों की दूसरी सोच थी कि देश भक्त रत्नाप्पा कुंभार के नेतृत्व वाला दूसरा पक्ष किसी भी तरह की राजशाही या सामंतवाद के खिलाफ था और तुरंत पूर्ण विलय चाहता था।
ऐसे में अब सरकार के सामने यह भी दबाव था कि क्या इस पर वोटिंग कराया जाए? लेकिन वीपी मेनन का मानना था कि कोल्हापुर की स्थिति बहुत संवेदनशील है और महाराजा की सहमति के बिना कोई भी कदम उठाने से बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि शुरुआत में नेताओं का मानना था कि मराठा समुदाय के लोग कोल्हापुर के राजा को अपना मुखिया मानते हैं, इसलिए कोई भी जल्दबाजी भरा कदम उनकी भावनाओं को आहत कर सकता है।
लेकिन जनवरी 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद कोल्हापुर में भारी दंगे भड़क उठे। स्थिति को संभालने के लिए भारत सरकार ने एक प्रशासक नियुक्त किया। इतिहासकार अरुण भोसले के अनुसार, यही घटना कोल्हापुर के पूर्ण विलय की दिशा में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
गौरतलब है कि कोल्हापुर का क्षेत्रफल 3,219 वर्ग मील, आबादी करीब 11 लाख और सालाना आय 1.28 करोड़ रुपये थी। दक्कन की सभी रियासतों में से कोल्हापुर के राजपरिवार को सबसे ज्यादा ‘प्रीवी पर्स’ (शाही भत्ता) मिला था।