कुशीनगर में ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया गया। सुबह से ही गांवों में धार्मिक माहौल रहा। महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई कर नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना की। इस वर्ष नाग पंचमी सावन सोमवार के दिन पड़ने से श्रद्धालुओं में विशेष महत्व रहा।
ग्रामीण अंचलों में नाग पंचमी की पूजा का विशेष महत्व है। कई घरों में महिलाओं ने दीवारों और दरवाजों पर गोबर, मिट्टी व हल्दी से नाग देवता की आकृति बनाई। नाग देवता को फूल, अक्षत, हल्दी, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान शिव की पूजा कर परिवार के सदस्यों के मंगल की प्रार्थना की गई। धार्मिक मान्यता है कि नाग देवता भगवान शिव से जुड़े हैं, इसलिए नाग पंचमी पर शिव आराधना का भी विशेष महत्व है।
गांवों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नाग पंचमी मनाई। बच्चों और बुजुर्गों ने भी पूजा में हिस्सा लिया। ग्रामीणों के अनुसार, यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। नागों और अन्य जीवों की रक्षा तथा उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की भावना इस पर्व से जुड़ी है।
सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। शिव मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ नाग देवता का स्मरण किया गया। ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा की और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा।
नाग पंचमी की ग्रामीण परंपराएं आज भी लोगों को अपनी संस्कृति और लोक आस्था से जोड़ती हैं। आधुनिक दौर में भी गांवों में इस पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाया जाना सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
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