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सोमवार को चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया टुडे तमिलनाडु राउंडटेबल’ में अभिनेता ध्रुव विक्रम ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सीएम विजय के प्रति अपना गहरा सम्मान प्रकट किया. इसके साथ ही, उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘बाइसन’ (Bison) में एक कबड्डी खिलाड़ी की भूमिका निभाने के लिए की गई कठिन शारीरिक और मानसिक तैयारी के अनुभवों को साझा किया.
बातचीत के दौरान ध्रुव ने अपने पिता विक्रम के साथ अपने रिश्तों, फिल्म उद्योग में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) की जारी बहस और फिल्में चुनने के अपने व्यक्तिगत नजरिए पर भी बात की. उन्होंने अपनी इस पूरी फिल्मी यात्रा की तुलना ‘ओडिसियस’ की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा से करते हुए एक दिलचस्प नजरिया पेश की.
विजय से मुलाकात पर ध्रुव विक्रम
विजय के बारे में बात करते हुए ध्रुव ने कहा कि वह हमेशा से उनके प्रशंसक रहे हैं और मानते हैं कि विजय सही मायनों में एक दूरदर्शी और क्रांतिकारी व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, ‘मैं हमेशा से विजय सर का प्रशंसक रहा हूं, वह सही अर्थों में एक दूरदर्शी और क्रांतिकारी नेता हैं. उनकी इस यात्रा के प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान है और उनके जीवन के इस नए अध्याय पर मुझे पूरा विश्वास है, उन्होंने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है और मैं भी उनमें से एक हूं.”
उन्होंने आगे कहा कि विजय के सफर ने उन्हें आत्म-विश्वास के महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित किया- “अब तक का सफर शानदार और साथ ही कठिन भी रहा है. आज भी सीएम को देखकर समझ आता है कि किसी व्यक्ति के लिए जबरदस्त आत्म-विश्वास होना कितना जरूरी है. दुनिया आप पर भरोसा करे, उससे पहले आपको खुद पर विश्वास होना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आप क्या बनना चाहते हैं.”
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‘बाइसन’ और कबड्डी सीखने का अनुभव
ध्रुव ने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही पता था कि उनकी साल 2025 की फिल्म ‘बाइसन’ शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होगी. वह निर्देशक मारी सेल्वराज के साथ काम करने को लेकर काफी उत्साहित थे, जिनकी फिल्मों के वे मुरीद रहे हैं. इस फिल्म में ध्रुव ने एक कबड्डी खिलाड़ी की भूमिका निभाई है.
शारीरिक चुनौतियों के बारे में जानने के बावजूद, ध्रुव ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें डर था कि क्या वे इस खेल को सही तरीके से समझ पाएंगे. निर्देशक मारी सेल्वराज ने उन्हें खेल में पूरी तरह ढलने के लिए पर्याप्त समय दिया. इसके बाद ध्रुव कई ऐसे लोगों से मिले, जो अपने गांवों के लिए कबड्डी खेलते थे और इस खेल के जरिए उन्हें सरकारी नौकरियां भी मिली थीं. ध्रुव को न सिर्फ उनका कौशल, बल्कि खेल के साथ उनका जुड़ाव भी बेहद दिलचस्प लगा.
‘खेल ने उन्हें जीवंत होने का एहसास कराया
ध्रुव ने बताया कि कबड्डी खिलाड़ियों के साथ बिताए गए उनके अनुभवों ने ‘बाइसन’ की दुनिया को समझने में बड़ी भूमिका निभाई, उन्होंने उन पलों को याद किया जब खिलाड़ी गंभीर चोटों के बावजूद खेलना जारी रखते थे. “यह मेरी यात्रा का एक बहुत बड़ा हिस्सा था, जहां मैं उन लड़कों के साथ खेलता था जो मुझसे भी ज्यादा गंभीर चोटों से जूझ रहे थे. जब मैं इस डर से बाहर बैठा होता था कि कहीं मेरी कोई और हड्डी न टूट जाए, तब भी वे अपनी चोटों के बावजूद पूरे उत्साह और आक्रामकता के साथ खेल रहे होते थे, मुझे लगता है कि यह खेल उन्हें जीवंत होने का एहसास कराता था.”
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शूटिंग के दौरान टूटा हाथ
ध्रुव ने खिलाड़ियों के साथ बिताए समय की कई यादें साझा कीं, उन्होंने ‘अभिषेक’ नाम के एक लड़के का जिक्र किया, जिसके घुटने पर भारी पट्टी बंधी हुई थी- “उन लड़कों के साथ मेरी कई खास यादें हैं. अभिषेक नाम का एक लड़का था जिसके घुटने पर बड़ी सी टेप लगी थी. जब मैंने उससे पूछा कि क्या उसने टीटी (टिटनेस) का इंजेक्शन लिया है, तो उसने सहजता से कहा कि उसे इसकी आदत है.’ खुद ध्रुव का बायां हाथ शूटिंग और कड़े प्रशिक्षण के दौर से ठीक पहले टूट गया था, उन्होंने उस दौरान हुई एक बातचीत को याद किया जो उनके दिल को छू गई- “शूटिंग के दौरान, एक कठिन ट्रेनिंग शेड्यूल से ठीक पहले मेरा बायां हाथ टूट गया. मेरे कोच मारी सेल्वराज सर के पास गए और कहा कि इसके बाएं हाथ की हड्डी टूट गई है. सेट पर किसी ने कहा कि प्लास्टर चढ़ाकर इसे खेलने देते हैं, लेकिन निर्देशक ने तुरंत कहा ‘क्या आपको लगता है कि इसका शरीर और हमारा शरीर एक जैसा है?’ इस बात ने मुझे अंदर तक प्रभावित किया. “
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