राजीव रंजन प्रसाद,दरभंगा। मिथिला संस्कृत शोध संस्थान भारत का ऑक्सफॉर्ड बनेगा। यह प्राचीन व आधुनिक विद्याओं का समन्वित केंद्र बनेगा। पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ये बातें रविवार की शाम मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के निरीक्षण क्रम में राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कही। श्री झा ने डीएम कौशल कुमार, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी, दरभंगा ग्रामीण विधायक ईश्वर मंडल व पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप चौधरी के साथ उच्चस्तरीय विमर्श के क्रम में कहा कि इस अनोखे संस्थान में उच्च शिक्षा व अनुसंधान के लिए मौलिक आवश्यकताओं पर बल दिया जाना अपरिहार्य है। संस्थान के विकास के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के निदेशक डॉ. अनिर्वान दास तथा उच्च शिक्षा सचिव राजीव रौशन से फोन पर बात भी की।
सांसद श्री झा ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा 15 दिनों के अंदर प्राचीन व दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का काम शुरू हो जाने की बात कही। राज्यसभा सांसद का अभिनंदन करते हुए उज्ज्वल कुमार ने वर्ष 1951 में हुए शिलान्यास की दुर्लभ तस्वीर भेंट की, जिसमें देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद, तत्कालीन राज्यपाल एमएस अणे, संस्थापक महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह तथा कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति है।
इस अवसर पर विधायक राजेश कुमार उर्फ ईश्वर मंडल ने कहा कि शोध संस्थान हमारी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। सांसद संजय झा के प्रयास से इसके जीर्णोद्धार से संस्थान को नई ऊर्जा मिलेगी। मौके पर डॉ. संतोष पासवान, डॉ. जोहा सिद्धिकी, डॉ. संजीव झा, डॉ. आनंद मोहन झा, कुंदन झा, जदयू नेता मदन प्रसाद राय, कन्हैया शाह, आरके चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रो. आदित्य नारायण मन्ना, मुरारी मोहन मिश्र, प्रदीप महतो, राजीव झा लल्लू, कमरे आलम, शंकर मिश्रा, सुजीत मलिक, सपना भारती, परितोष यादव, देवेंद्र झा, अंजुला शर्मा, रंजू कुमारी आदि थे।
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