Explainer: वंदे मातरम् पर क्यों घिरी कांग्रेस? क्या सोनिया-राहुल गांधी ने वाकई किया राष्ट्रगीत का अपमान, कानू – India.com

आजादी के 80वें साल के समारोह में पहली बार लाल किले पर राष्ट्रगान ‘जन गण मण’ ने पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाया गया. कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में भी 15 अगस्त पर तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रीय गीत गाया गया. वंदे मातरम् गाने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विवादों में आ गए हैं. BJP ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगाया है. जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसने वही किया, जो देश में आजादी के बाद से चला आ रहा है.

आइए समझते हैं आखिर क्या है वंदे मातरम् विवाद? आजादी के जश्न के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या वाकई राष्ट्रीय गीत का अपमान किया? वंदे मातरम् को लेकर नया कानून क्या है? क्या राहुल-सोनिया और खरगे को सजा हो सकती है:-

15 अगस्त को कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया. मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के तमाम नेता मौजूद थे. तिरंगा फहराया गया. फिर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गाया गया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी इसके वीडियो में सोनिया गांधी राष्ट्रीय गीत गाने के दौरान खरगे से कुछ कहती दिखीं. विवाद यहीं से शुरू हुआ.

BJP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरा वंदे मातरम् गाए जाने पर सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की. BJP ने इसका वीडियो भी X पर शेयर किया. पार्टी की ओर से ये भी दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे राष्ट्रीय गीत गाने के दौरान परेशान दिखे. BJP नेता इसके बाद कांग्रेस को वंदे मातरम् के अपमान को लेकर घेर रहे हैं.
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BJP के आरोपों और वायरल वीडियो पर कांग्रेस ने अपना पक्ष रखा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में पूरा वंदे मातरम् गाया गया था. इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी. जयराम रमेश के मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं था. वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि वे लंबे समय से खड़े थे.
इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार (19 अगस्त) को कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् पूरा न गाने का फैसला हैरान करने वाला और देशविरोधी है. उन्होंने कहा- “कांग्रेस ने 1937 में राष्ट्रगीत के दो टुकड़े कर मुस्लिम तुष्टीकरण किया था. उस फैसले से दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ.”
शाह के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया. कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने ऐलान किया कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा (छंद) ही गाएगी.

वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं. यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल था. ‘आनंदमठ’ का प्रकाशन 1882 में हुआ था. 14 अगस्त 1947 को संविधान सभा की पहली बैठक की शुरुआत वंदे मातरम् से हुई थी. 1896 में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया था. 1950 में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया.
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वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्
शस्यश्यामलां मातरम्।
वन्दे मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केनो मां एतो बले,
बहुबल धारिणीं, नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।
वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्,
अमलाम् अतुलाम्, सुजलां सुफलाम्
मातरम्।
वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्।
‘द नेहरू आर्काइव’ के मुताबिक, 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 1937 के बीच कांग्रेस वर्किंग कमिटी की कलकत्ता बैठक हुई. इसमें तय किया गया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ पहले 2 पैरा गाए जाएं. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि बाद के हिस्सों में धार्मिक और देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ थे. इनपर कुछ मुस्लिम नेताओं को आपत्ति थी. नेहरू ने 29 अक्टूबर 1937 को समझाया कि पहले 2 छंदों में ऐसी कोई बात नहीं है जो किसी समुदाय की धार्मिक भावना के खिलाफ हो. इसलिए पूरे देश के लिए ऐसा हिस्सा चुना गया, जिसे सभी समुदाय आसानी से स्वीकार कर सकें. कांग्रेस पुरानी व्यवस्था को ही फॉलो कर रही है.
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संविधान संशोधन में कहा गया है कि जो व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या उसके गायन में शामिल सभा में रुकावट डालता है, उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, वंदे मातरम् के पूरे 6 छंद ही इसका आधिकारिक संस्करण हैं. जब राष्ट्रगीत गाया जाता है, तो इसी पूरे संस्करण को गाने का निर्देश है. हालांकि, दोनों नोटिफिकेशन में 6 छंद न गाने पर कार्रवाई करने की बात नहीं है. 2026 के कानून में भी यह साफ नहीं कहा गया है कि 6 छंद पूरे न गाने पर अपराध होगा. कानून में अपराध तब है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का गायन रोकता है या गा रही सभा में रुकावट डालता है. ऐसे में साफ है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का केस नहीं बनता.
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अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली … और पढ़ें
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