शादी छिपाने वाले लिव-इन पार्टनर को होगी जेल: धोखा दिया तो 5 साल तक की सजा; राजस्थान UCC बिल में जानिए क्या … – Dainik Bhaskar

राजस्थान में एक समान कानून लागू करने वाला यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल विधानसभा में पेश हो गया है। कानून बनने के बाद बिल के प्रावधान राजस्थान में जन्मे हर व्यक्ति पर लागू होंगे, भले ही कोई विदेश में ही क्यों न रह रहा हो।
399 पेज के इस बिल में शादी, लिव-इन, तलाक, प्रॉपर्टी के वारिस को लेकर नियम तय किए हैं। लिव-इन रिलेशनशिप छिपाने या रिश्ते में एक दूसरे को चीट (धोखा देने) करने पर 5 साल की जेल हो सकती है। पिता की प्रॉपर्टी में वसीयत नहीं है तो बेटे-बेटियां बराबर के हकदार होंगे। पत्नी के जिंदा रहते बिना कानूनी तलाक के कोई दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।
हालांकि संविधान के तहत संरक्षित एससी/एसटी और कुछ अन्य समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- राजस्थान के यूसीसी बिल में क्या-क्या है…
लिव-इन रिलेशनशिप : रिश्ता छिपाया या एक दूसरे को धोखा दिया तो जेल
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा। दोनों पार्टनर की उम्र 21 साल से अधिक होनी चाहिए। सरकार लिव-इन के लिए रजिस्ट्रार जनरल, स्थानीय रजिस्ट्रार, इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था कर सकेगी।
रजिस्ट्रार एप्लिकेशन की जांच करेगा। उस समय दोनों पार्टनर को बुला भी सकेगा। सही पाए जाने पर प्रमाण पत्र जारी करेगा और गलत या संदिग्ध पाए जाने पर कैंसिल भी कर सकेगा। हालांकि कैंसिल के कारण लिखित में बताने होंगे। यदि लिव-इन पार्टनर रजिस्ट्रेशन कैंसिल से असंतुष्ट हैं, तो ऊपर महा रजिस्ट्रार का दरवाजा खटखटा सकेंगे।
खुद की शादी या अन्य जरूरी सूचना छिपाकर एक दूसरे को धोखा दिया या जबरन लिव-इन में रहने वालों को 5 साल की जेल का प्रावधान है। यदि रजिस्ट्रेशन के समय ही रजिस्ट्रार को कुछ संदिग्ध लगा, तो सूचना संबंधित थाने को दे सकता है।
नाबालिग को लिव-इन में रखा तो लग सकता है पॉक्सो एक्ट
लिव-इन रिलेशनशिप की इच्छा रखने वाले दोनों बालिग होने चाहिए। एक भी नाबालिग है, तो साथ रहने की इजाजत नहीं मिलेगी। इसकी सूचना परिजनों को दी जाएगी।
यदि लिव-इन में किसी भी पार्टनर ने नाबालिग (18 से कम) को अपने साथ रखा, तो लैंगिक अपराधों के तहत लगने वाले कानून के दायरे में आ जाएगा। पॉक्सो का मुकदमा भुगतना पड़ सकता है।
बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन तो जुर्माना और सजा
लिव-इन का रजिस्ट्रेशन एक महीने में नहीं करवाया तो पर दोषी पाए जाने पर 3 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपए जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
लिव-इन में पैदा बच्चे भी होंगे पैतृक प्रॉपर्टी के हकदार
लिव-इन के बाद अगर कोई मेल पार्टनर साथ रहने वाली फीमेल पार्टनर को छोड़ देता है, तो वह भरण-पोषण के लिए कोर्ट में दावा करने की हकदार होगी। दोषी पाए जाने पर मेल पार्टनर को फीमेल पार्टनर का खर्चा उठाना पड़ेगा।
लिव-इन में जन्मा बच्चा, वैध संतान रहेगा और दोनों की जिम्मेदारी रहेगी।
इस बच्चे को वैवाहिक रिश्ते से पैदा हुए बच्चों की तरह ही संपत्ति और उत्तराधिकार के पूर्ण कानूनी अधिकार मिलेंगे।
वन मैरिज रूल : पति-पत्नी में से एक के जिंदा रहते दूसरे की नहीं हो सकेगी शादी
बिल में शादी के लिए सभी धर्म-समुदायों के लिए एक जैसे नियम तय किए गए हैं। शादी का रजिस्ट्रेशन सभी के लिए अनिवार्य रहेगा। सरकार विवाह पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार जनरल, स्थानीय रजिस्ट्रार, इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था कर सकेगी।
शादी के 60 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन की अर्जी देना जरूरी होगा। नहीं तो 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया जा सकेगा।
नोटिस के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया तो जुर्माना 25 हजार तक का हो सकता है।
‘वन मैरिज रूल’ के तहत शादी के बाद यदि एक साथी (पति या पत्नी) जिंदा है, तो दोनों में से कोई भी बिना तलाक दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।
पुरुषों के लिए शादी के लिए न्यूनतम आयु 21 और महिलाओं के लिए 18 साल ही रखी है।
किसी भी समाज या धर्म से जुड़े लोग अपना विवाह संबंधित धार्मिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों के अनुसार कर सकेंगे।
तलाक के नियम : आपसी सहमति से भी तोड़ सकेंगे शादी
बिल में शादी के जैसे ही तलाक के नियम भी अलग-अलग नहीं रहेंगे। तलाक के नियमों को बिल में एक जैसा रखा गया है। इनमें व्यभिचार (बुरी आदतें), क्रूरता, दो साल तक अलग रहना, धर्म परिवर्तन, कुछ निर्धारित मानसिक या शारीरिक स्थितियां, संन्यास लेना, सात साल तक लापता रहना और भरण-पोषण संबंधी आदेश का उल्लंघन शामिल हैं।
प्रॉपर्टी : वसीयत नहीं, तो बेटे-बेटियां संपत्ति की बराबर की हकदार
वसीयत के बिना मौत होने की स्थिति में बेटे-बेटी को एक समान संपत्ति का अधिकार मिलने के प्रावधान हैं। पहली श्रेणी में उत्तराधिकारियों में बेटे, बेटियां, पति या पत्नी और माता-पिता के साथ पूर्व-मृत संतान के निर्धारित वंशज शामिल होंगे। प्रत्येक जीवित पति या पत्नी और संतान को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार हिस्सा मिलेगा, जबकि माता-पिता को मिलकर एक हिस्सा माना जाएगा।
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