Chatra News: चतरा से इटखोरी तक गूंजेगा हर-हर महादेव का जयघोष – Hindustan

Chatra News: चतरा प्रतिनिधि सावन की अंतिम सोमवारी पर चतरा से इटखोरी तक आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। रविवार को सैकड़ों श्रद्धालु निजी वाहनों से इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर पहुंचे। यहां मोहानी नदी में स्नान कर श्रद्धालु जल उठाएंगे और मंदिर परिसर स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद दोबारा जल लेकर चतरा के लिए पैदल रवाना हुए।

इटखोरी से चतरा तक करीब 35 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और उत्साह से भरी रहा। रास्तेभर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते, झूमते-नाचते और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ेंगे। रविवार को ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से इटखोरी पहुंच जाते है और रात में वहीं विश्राम करने के बाद सोमवार सुबह पैदल यात्रा शुरू करते है।

चतरा पहुंचने के बाद श्रद्धालु सबसे पहले शहर के प्रसिद्ध लकलकवानाथ शिव मंदिर में पहुंचकर संकल्प लेंगे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद श्रद्धालु शहर के प्राचीन कठौतिया शिव मंदिर पहुंचेंगे, यहा भी संकल्प कराने के बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे। दोनों प्रमुख शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के बाद श्रद्धालु अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूरे यात्रा मार्ग पर चहल-पहल बढ़ गई है। आस्था की इस पैदल यात्रा में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय बनजाता है।

फोटो23 अगस्त चतरा 16- इटखोरी स्थित नंदी की प्रतिमा

अंतिम सोमवारी पर सिंघानी में निकाली जाएगी कलश यात्रा

यज्ञ आहूति के बाद, भंडारे का होगा आयोजन

पत्थलगड्डा प्रतिनिधि

प्रखण्ड क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मोरशेरवा पहाड़ी मंदिर एवं मां दक्षिणेश्वरी भगवती मंदिर सहित विभिन्न गांवों में बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना एवं जल अर्पित करने के लिए आज काफ़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। अंतिम सोमवारी पर सिंघानी गांव के सनातन धर्म प्रेमियों ने सावन के अंतिम सोमवारी पर बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करने के लिए महावीर चौक सिंघानी से श्रद्धालुओं की भीड़ कतारबद्ध होकर परसोनिया नदी से जल उठाकर नगर भ्रमण करने की तैयारी लगभग पुर्ण कर ली गई है। इस दौरान मां भगवती मंदिर परिसर में स्थित शिवलिंग एवं सिंघानी पहाड़ी पर स्थित अर्जुनेश्वरम धाम में श्रद्धालुओं ने विधिवत् बाबा भोलेनाथ की पूजा- अर्चना तथा जल अर्पित करने को लेकर भी तैयारी पूरी कर ली है। वहीं इस पावन अवसर पर सिंघानी के महावीर चौक में युवकों की मण्डली ने यज्ञ की आहूति को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां शुरू कर दी है। जबकि इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया जाना है। बताते चलें कि स्थानीय युवकों ने पिछले कुछ वर्षों से सावन के अंतिम सोमवारी पर यह विधिवत् कार्यक्रम को आयोजित कर रहे हैं। ज्ञात हो कि अंतिम सोमवारी पर नावाडीह गांव में भी श्रद्धालुओं द्वारा विधिवत् कलश यात्रा निकाली जाएगी जिसमें काफ़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। मालूम हो कि बुध नदी से श्रद्धालुओं द्वारा जल उठाया जाएगा उसके बाद नगर भ्रमण के बाद बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित किया जाएगा। जिसे लेकर लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है।

फोटो23 अगस्त चतरा 17- पत्थलगड्डा शिव मंदिर

विशेष ध्यानार्थ

शहस्त्र शिवलिंग की महिमा अपरंपार एक बार मे ही 1008 शिवलिंग का स्वत: होता है जलाभिषेक

सहस्र शिवलिंग मंदिर के सामने स्थापित नंदी की प्रतिमा भी काफी अद्भुत है

सावन के अंतिम सोमवारी पर आज भद्रकाली मंदिर स्थित शहस्त्र शिवलिंग पर जलाभिषेक को श्रद्धालुओं की उमड़ेगी भीड़

इटखोरी प्रतिनिधि

मां भद्रकाली मंदिर परिसर में सहस्त्र शिवलिंग महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग अपने आप में अनूठा है। खास बात यह कि इस सहस्त्र शिवलिंग का जलाभिषेक करने पर एक साथ 1008 शिवलिंग का जलाभिषेक स्वत: होता है। यहां सहस्त्र शिवलिंग महादेव की पूजा बारह सौ वर्षों से होते आ रही है। 1008 शिवलिंग को अपने आप में समाहित करने वाले इस अनूठे शिवलिंग को नौंवी शताब्दी काल में स्थापित किया गया था। सावन के अंतिम। पावन दिवस पर इस सहस्त्र शिवलिंग का जलाभिषेक करने बाबा के भक्त दूर-दूर से आकर जलाभिषेक करेंगे।

सहस्र शिवलिंग में 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उत्कीर्ण किए गए हैं

दरअसल बारह सौ वर्ष पूर्व स्थापित इस सहस्र शिवलिंग की बनावट काफी अद्भुत है। समतल जमीन से चार फुट ऊंचे इस सहस्र शिवलिंग में 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उत्कीर्ण किए गए हैं। ऐसे में सहस्र शिवलिंग के मस्तूल पर जब जलाभिषेक किया जाता है, तो जलाभिषेक का जल सभी 1008 शिवलिंग को स्पर्श कर नीचे आता है। एक ही पत्थर को तराश कर बनाए गए इस सहस्र शिवलिंग में पहले योनिपीठ नहीं था। बाद में पुजारियों के सुझाव पर सहस्र शिवलिंग के चारों ओर योनिपीठ बनाया गया।

इस सहस्र शिवलिंग की स्थापना गुप्त वंश के शासकों ने किया था।

भद्रकाली मंदिर का सहस्र शिवलिंग पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी काफी महत्व का माना जाता है। पुरातत्वविदो का कहना है कि इस सहस्र शिवलिंग की स्थापना गुप्त वंश के शासकों ने किया था। तब से लेकर आज तक शिव भक्त इस सहस्र शिवलिंग की पूजा अर्चना तथा जलाभिषेक करते आ रहे हैं। सहस्र शिवलिंग मंदिर के सामने स्थापित नंदी की प्रतिमा भी काफी अद्भुत है। एक ही पत्थर को तराश कर बनाई गई नंदी की प्रतिमा भी उसी काल खंड की बताई जाती हैं। यही वजह है कि इस मंदिर का महत्व काफी बढ़ जाता है, और लोगों की श्रद्धा इस मंदिर के प्रति अद्भुत है। इसके अलावा भक्तों ने सर्वप्रथम माता भद्रकाली मंदिर में भी पूजा अर्चना किया इसके बाद अन्य देवालय में भी पूजा-अर्चना कर शहस्त्र शिवलिंग महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करते हैं。

फोटो23 अगस्त चतरा 18- इटखोरी भद्रकाली स्थित शिवलिंग

फोटो23 अगस्त चतरा 19- इटखोरी में जागरण प्रस्तुत करते कलाकार

सिमरिया हनुमान मंदिर प्रांगण में भव्य रुद्राभिषेक का आयोजन आज

सिमरिया निज प्रतिनिधि

सावन के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर सिमरिया हनुमान मंदिर प्रांगण में भव्य रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल देखा गया। आयोजन कमेटी के सदस्य मनोरंजन महाजन ने बताया कि इस विशेष पूजा-अर्चना को वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न कराने के लिए बनारस (वाराणसी) से पांच प्रकांड विद्वान पंडितों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक के सफल समापन के बाद महाप्रसाद के रूप में एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया है। जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस महाअनुष्ठान में सिमरिया सहित कुट्टी, बानासाडी, बन्हे, गोवा, टिकुलिया और सवानों आदि गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। विशेष कर इस पूरे धार्मिक कार्यक्रम को अनुशासित और सफल बनाने में मनोरंजन महाजन के साथ,रणजीत सिंह, अमित गुप्ता, शैलेश कुमार सहित कई स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभा रहे है। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए इस भव्य अनुष्ठान का आयोजन किया गया है।

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में ‘हिन्दुस्तान’ विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News