भास्कर संवाददाता | झुंझुनूं
केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय द्वारा कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान में नगर परिषद का प्रदर्शन 2020 से 2026 तक निराशाजनक रहा। हर साल सर्वेक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट में शहर की कमियां, बदहाली और रेड रिमार्क दर्ज किए गए। सुधार के निर्देश भी दिए गए।
इसके बावजूद कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई। सुधार के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। बजट ही बढ़ाया गया। प्रशासनिक मुस्तैदी नहीं दिखी। शहर ने राष्ट्रीय स्तर पर साख गंवाई। भास्कर ने स्वच्छता के मामले में शहर को टॉप 10 में लाने के लिए शहरवासियों से सुझाव लिए तो सामने आया कि इसके लिए नगर परिषद को अपना स्वच्छता ढांचा पूरी तरह बदलना पड़ेगा। मॉनिटरिंग ढांचे में बड़ा बदलाव जरूरी है। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
शहर को देश के टॉप-10 स्वच्छ शहरों में शामिल कराने के लिए सुधार का एक व्यावहारिक रोडमैप भी बताया गया। शहरवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल सफाई नहीं चाहते। वे प्रशासनिक जवाबदेही चाहते हैं। यदि नगर परिषद का अमला अब भी नहीं जागा और मॉनिटरिंग का ढर्रा नहीं बदला, तो शहर कभी रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाएगा। अधिकारियों को दफ्तरों से बाहर निकलना होगा। जनता के इन सुझावों पर गौर करना होगा। शहर के रीको एरिया में मुख्य सड़क के किनारे लगा कचरे का ढेर। . चिकित्सक डॉ. अमित कुमार का कहना है कि शहर में जहां भी खाली भूखंडों पर कचरे के ढेर हैं, वहां ब्लैक स्पॉट्स बन जाते हैं। इन स्पॉट्स को साफ किया जाए। वहां गमले, रंगोली और सेल्फी पॉइंट बनाए जाएं। लोग वहां दोबारा कचरा डालने से झिझकेंगे। .चिकित्सक डॉ. रमेश यादव का कहना है कि स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिए हर महीने स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता कराए। सर्वश्रेष्ठ वार्ड को विकास कोष में अतिरिक्त बजट मिले। स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाए। नगर परिषद पूर्व आयुक्त राजेंद्र जोशी का कहना है कि पहले हर वार्ड में इंस्पेक्टर नियमित पूरी मॉनिटरिंग करता था। लेकिन पिछ़ले कुछ सालों में निगरानी में कमी आई है। हर दिन निकला कचरा सड़क पर ना आकर डपिंग यार्ड तक सुरक्षित पहुंचे। वार्डों व मुख्य सड़कों के साथ बाजारों में नियमित सफाई होनी चाहिए। शहर में सफाई को लेकर नए प्रयोग हो रहे है। पर व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। इसकी वजह मॉनिटिरिंग का अभाव है। सफाई निरीक्षक जिम्मेदारी तय करनी होगी। .सामाजिक कार्यकर्ता सपना राणासरिया का कहना है कि सड़कों के किनारे निर्माण सामग्री का मलबा शहर का रूप बिगाड़ता है। इसके लिए अलग हेल्पलाइन नंबर जारी हो। मलबा न उठाने वालों पर पेनल्टी लगाई जाए। .सामाजिक कार्यकर्ता अकराज कुरैशी का कहना है कि सफाई व्यवस्था बिगड़ने पर सेनेटरी इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हर वार्ड के लिए नोडल अधिकारी बने। उसकी मासिक रिपोर्ट के आधार पर ही वेतन जारी हो। .व्यापारी बाबूलाल वर्मा का कहना है कि दिन में भीड़ की वजह से नेहरू बाजार, मंडावा मोड़ और रोडवेज बस स्टैंड पर सफाई संभव नहीं है। इन व्यापारिक क्षेत्रों में रात 10 बजे बाद सफाई का विशेष अभियान चले। .एडवोकेट धर्मवीर मीणा का कहना है कि शहर से बाहर डंपिंग यार्ड में आधुनिक सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग और बायो-मेथेनेशन प्लांट तुरंत शुरू किया जाए। .व्यापारी महेश सोनी का कहना है कि सार्वजनिक शौचालयों में पानी-लाइट की व्यवस्था हो। बाहर फीडबैक मशीनें लगें। क्यूआर कोड भी लगाए जाएं। इससे आम जनता सीधे सफाई की रेटिंग दे सकेगी। टिपर्स में जीपीएस ट्रैकिंग हो। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो।
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