नई दिल्ली, विशेष संवाददाता।
चीन ने गलवान घाटी संघर्ष और उससे पहले डोकलाम गतिरोध के दौरान सेना का नेतृत्व करने वाले अपने एक जनरल झाओ जोंगकी को महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों से हटा दिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ऐसे समय में यह कार्रवाई की है जब उनकी भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसएस) अजित डोभाल विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के लिए चीन गए थे।
इसके अलावा चीन की शीर्ष सैन्य संस्था केंद्रीय सैन्य आयोग से भी दो जनरलों झांग युक्सिया तथा लियू झेनली को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बर्खास्त कर दिया गया है। उनकी बखार्स्तगी के बाद सात सदस्यीय सैन्य आयोग में सिर्फ दो सदस्य रह गए हैं, जिनमें एक राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद हैं। जनरल झांग आयोग के दूसरे वरिष्ठ सदस्य और उपाध्यक्ष भी थे। चीनी सामाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार चीनी सेना की पश्चिम थियेटर कमान के प्रमुख रहे जनरल झाओ जोंगकी को देश के शीर्ष राजनीतिक निकाय चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कांफ्रेंस (सीपीपीसीसी) और दो अन्य पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें हटाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है, न ही किसी प्रकार की जांच उनके खिलाफ शुरू की गई है। यही कारण है कि राष्ट्रपति जिनपिंग की भारत यात्रा से पूर्व इसे एक कूटनीतिक फैसले के नजरिये से भी देखा जा रहा है।
बता दें कि 2017 में डोकलाम में जब भारत और चीन की सेनाओं के बीच 73 दिन लंबा गतिरोध चला था उस समय वे पश्चिम थियेटर कमान का नेतृत्व कर रहे थे। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के दौरान भी वे थियेटर कमान के प्रमुख थे। उस समय विभिन्न स्रोतों से ऐसी सूचनाएं आई थीं कि भारत को सबक सिखाने के लिए उन्होंने गलवान संघर्ष की साजिश रची थी। उनकी छवि चीनी सेना में एक भारत विरोधी जनरल की रही है। माना जा रहा है कि इस कदम का भविष्य में होने वाली भारत-चीन सीमा वार्ताओं में सकारात्मक असर दिख सकता है।
पिछले एक दशक के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और असफलताओं के आरोप में सौ से भी अधिक सैन्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया है। इनमें से कई लापता हो गए। इससे सेना पर लगातार उनकी पकड़ मजबूत हुई है। मौजूदा कार्रवाई को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
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