Feedback
सुबह ऑफिस पहुंचते वक्त चेहरा बिल्कुल फ्रेश और चमकता हुआ… लेकिन शाम तक वही चेहरा थका हुआ, सूजा-सूजा और बेजान नजर आने लगे तो कैसा लगेगा? चीन में इन दिनों कई महिला कर्मचारी इसी परेशानी से जूझने का दावा कर रही हैं. उनका कहना है कि ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने के बाद उनकी त्वचा, आंखों और यहां तक कि उनकी पूरी पर्सनैलिटी पर असर पड़ रहा है.
यही वजह है कि चीन में कुछ महिलाएं अब ऑफिस में काम करते समय अपना चेहरा ढककर बैठ रही हैं. कोई चेहरे पर सनस्क्रीन की मोटी परत लगा रही है, तो कोई डेस्क पर छतरी यानी पैरासोल लगाकर काम कर रही हैं. कुछ कर्मचारी सन हैट पहन रही हैं और कुछ तो पूरे चेहरे को ढकने वाले मास्क तक का इस्तेमाल कर रही हैं.
सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक नया ट्रेंड चल पड़ा है, जिसे लोग ‘ऑफिस एजिंग’ कह रहे हैं. यानी उनका मानना है कि ऑफिस में रोजाना लंबे समय तक रहने से वे समय से पहले बूढ़ी दिखने लगी हैं.
एक महीने की नौकरी में ही बदल गया चेहरा!
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत के एक सोशल मीडिया यूजर ने हाल ही में अपनी परेशानी शेयर की. उसने बताया कि नौकरी शुरू किए अभी सिर्फ एक महीना हुआ था, लेकिन उसे अपने चेहरे का रंग पहले से काफी बदला हुआ नजर आने लगा. साथ ही उसकी आंखों में अक्सर थकान और जलन जैसी समस्या रहने लगी.
उसकी पोस्ट देखते ही कई दूसरे लोग भी अपनी-अपनी परेशानियां बताने लगे. एक महिला ने कहा कि छुट्टी लेकर कुछ समय ऑफिस से दूर रहने के बाद उसका चेहरा पहले से ज्यादा साफ और गोरा नजर आने लगा. वहीं, एक अन्य यूजर ने ऑफिस में लगातार दूसरे लोगों के सिगरेट के धुएं यानी सेकेंड हैंड स्मोक की शिकायत की.
ऑफिस में ही लगा ली छतरी!
इन शिकायतों के बाद कुछ चीनी कर्मचारियों ने अपने स्तर पर इसका ‘इलाज’ भी खोज लिया. कई लोग अपनी डेस्क पर छोटी छतरियां लगाने लगे. कुछ कर्मचारी ऑफिस के अंदर ही सन हैट पहनकर बैठ रहे हैं. वहीं, कुछ लोग चेहरे और हाथों पर खूब सारा सनस्क्रीन लगाकर काम कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और पोस्ट में कुछ महिलाएं चेहरे को ढककर कंप्यूटर पर काम करती दिखाई दे रही हैं. उनका मकसद ऑफिस की रोशनी और दूसरे पर्यावरणीय कारणों से अपनी त्वचा को बचाना है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऑफिस के अंदर ऐसी नौबत क्यों आ रही है?
सिर्फ रोशनी नहीं, ऑफिस का पूरा माहौल जिम्मेदार
चीन के एक लाइटिंग डिजाइनर योकी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कई ऑफिस में ऐसी ठंडी रोशनी यानी कूल-टोन लाइटिंग का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका मकसद कर्मचारियों को ज्यादा देर तक एक्टिव और सतर्क रखना होता है. माना जाता है कि इससे काम करने की क्षमता बढ़ सकती है. लेकिन परेशानी सिर्फ ऑफिस की लाइट तक सीमित नहीं है.
ऑफिस की सूखी हवा, धूल भरे वेंटिलेशन सिस्टम और कमरे में बढ़ता कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर भी कर्मचारियों को परेशान कर सकता है. लंबे समय तक ऐसे माहौल में काम करने से शरीर में थकान और बेचैनी बढ़ सकती है.
1980 के दशक में सामने आया था ‘सिक बिल्डिंग सिंड्रोम’
ऑफिस के माहौल से होने वाली ऐसी परेशानियों को समझने के लिए मेडिकल जगत में ‘सिक बिल्डिंग सिंड्रोम’ शब्द का इस्तेमाल किया गया.
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन ) ने 1980 के दशक में इस टर्म को सामने रखा था. इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जिसमें किसी खास इमारत या ऑफिस में ज्यादा समय बिताने के दौरान लोगों को सिरदर्द, नाक बंद होना, त्वचा का सूखना, गले में जलन, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं. खास बात यह है कि ऑफिस से बाहर निकलने के बाद कई लोगों को राहत महसूस होने लगती है.
ऐसी समस्या आधुनिक इमारतों के बढ़ते चलन के साथ भी जुड़ी है. ऊर्जा बचाने के लिए कई इमारतों को ज्यादा एयरटाइट बनाया गया. इससे गर्मी और ठंडक को अंदर बनाए रखने में मदद मिली, लेकिन कई जगहों पर ताजी हवा का प्रवाह कम हो गया.
2008 की एक स्टडी में भारतीय सोशल मेडिसिन विशेषज्ञ सुमेधा जोशी ने भी सिक बिल्डिंग सिंड्रोम और कर्मचारियों की काम करने की क्षमता के बीच संबंध पर बात की थी. इसमें बेहतर वेंटिलेशन, नियमित ब्रेक और ऑफिस के तनाव को कम करने जैसे उपायों की जरूरत बताई गई थी.
चीन में ‘ऑफिस एजिंग’ का मुद्दा अब सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर ऑफिस जाने वाली महिलाओं ने अपने लुक को लेकर भी चिंता जतानी शुरू कर दी है. एक वायरल टिकटॉक ट्रेंड में लोग सुबह ऑफिस पहुंचने के समय की अपनी तस्वीर और कई घंटे काम करने के बाद की तस्वीर शेयर कर रहे हैं.
सुबह चेहरा चमकदार, आंखें फ्रेश और मेकअप एकदम परफेक्ट नजर आता है. लेकिन शाम तक बाल ऑयली, त्वचा बेजान और चेहरा सूजा हुआ दिखाई देने लगता है. कई चीनी सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से गर्दन आगे की तरफ झुकने लगती है और कंधे गोल हो जाते हैं.
कुछ लोगों ने तो मजाक में यह तक कहा कि काम करते समय लगातार माथे पर शिकन डालने से चेहरे पर ‘सोचने वाली लकीरें’ यानी फाइन लाइंस तक पड़ने लगी हैं. एक यूजर ने अपनी परेशानी को बेहद दिलचस्प अंदाज में लिखा- मैं हर दिन ऑफिस में बूढ़ी हो रही हूं. कंपनी मेरी मेहनत की कीमत देती है, लेकिन मेरी खूबसूरती और सेहत की कीमत कौन देगा?
ऑफिस में ‘डेस्क पेट’ से तनाव भगाने का जुगाड़
ऑफिस की थकान और तनाव से निपटने के लिए चीनी कर्मचारी अजीबोगरीब तरीके भी अपना रहे हैं. कुछ लोग खाली मिल्क-टी के कप को ही छोटा सा ह्यूमिडिफायर बनाकर डेस्क पर रख लेते हैं.
वहीं, कुछ कर्मचारियों ने अपने डेस्क पर अनोखे ‘पेट’ पाल लिए हैं. ये कोई बिल्ली या कुत्ता नहीं, बल्कि पत्थर और आम की गुठली जैसी चीजें हैं. कर्मचारी तनाव महसूस होने पर इन्हें सहलाते या थपथपाते हैं. उनका मानना है कि इससे उन्हें मानसिक तौर पर थोड़ा सुकून मिलता है.
देखने में ऑफिस में छतरी लगाकर बैठना या चेहरे पर मास्क पहनकर कंप्यूटर चलाना भले ही मजेदार लगे, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है. आखिर कर्मचारी ऐसा करने को मजबूर क्यों महसूस कर रहे हैं?
चीन में मई तक औसत साप्ताहिक कामकाजी समय करीब 48.2 घंटे बताया गया, जो वहां की तय 44 घंटे की वैधानिक सीमा से ज्यादा है. यानी लोग हफ्ते में बड़ी संख्या में घंटे ऑफिस में गुजार रहे हैं.
ऐसे में ‘ऑफिस एजिंग’ सिर्फ त्वचा या सुंदरता की चिंता नहीं है. यह लंबे काम के घंटे, खराब इनडोर वातावरण, तनाव, कम ब्रेक और कर्मचारियों की सेहत से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.
यह भी पढ़ें: 50 हजार बीयर कैन की चोरी, कंपनी ने बोला- 19 दिन में वापस दे जाना!
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने इस पूरी बहस को बेहद सटीक तरीके से समेटते हुए कहा- अच्छा ऑफिस कोई सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का बुनियादी अधिकार है. लोगों को अपने काम की जगह को बेहतर बनाने का हक होना चाहिए, न कि उन्हें ऑफिस की मशीन का एक पुर्जा बनकर रह जाना चाहिए.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू