पहाड़ों से लेकर छोटे कस्बों तक कनेक्टिविटी, देश में 30000 करोड़ में बनेंगे 100 नए एयरपोर्ट – ABP News

केंद्र सरकार भारत के छोटे शहरों की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए अथक प्रयास कर रही है. इसके लिए हाल ही में एक और नई योजना शुरू करने का प्लान बनाया जा रहा है. इस योजना के तहत अगले 10 साल में देशभर में 100 नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे. ये काम मॉडिफाइड उड़ान योजना के तहत किया जाने वाला है. इस योजना का मकसद छोटे शहरों और कस्बों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाना है.
नागरिक उड्डयन मंत्री ने बताया
बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक इस योजना के बारे में बात करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने बताया है कि, इस योजना पर सरकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वाली है. इसका मुख्य उद्देश्य छोटे शहरों, पहाड़ी इलाकों, दूरदराज के क्षेत्रों और द्वीपों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है. इससे पर्यटन, कारोबार और रोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ लोगों को जरूरी सेवाओं तक पहुंचना आसान होने की उम्मीद है.
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100 बनाने का टारगेट
केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च 2026 में मॉडिफाइड उड़ान योजना को मंजूरी दी थी. ये योजना 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी और इसके लिए कुल 28840 करोड़ रुपये का सरकारी बजट रखा गया है. इस योजना के तहत पहले से मौजूद लेकिन इस्तेमाल में नहीं आ रही हवाई पट्टियों से 100 एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे. इसके लिए 12159 करोड़ रुपये रखे गए हैं. करीब 441 एयरपोर्ट और हवाई अड्डों को तीन साल तक संचालन और रखरखाव में मदद भी दी जाएगी.
सरकार का कहना है कि हवाई यात्रा की मांग अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. टियर-2 और टियर-3 शहरों, पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में भी लोग बेहतर हवाई कनेक्टिविटी चाहते हैं.
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सिर्फ एयरपोर्ट बनाना काफी नहीं
पुरानी उड़ान योजना के अनुभव से पता चलता है कि एयरपोर्ट बन जाने के बाद भी नियमित उड़ानें चलाना चुनौती हो सकता है. CAG की 2023 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, UDAN-3 तक मंजूर 774 में से 403 रूट पर उड़ानें शुरू ही नहीं हो पाईं. जो 371 रूट शुरू हुए, उनमें से सिर्फ 112 ने तीन साल की पूरी अवधि पूरी की. मार्च 2023 तक केवल 54 रूट ही सरकारी सहायता की अवधि खत्म होने के बाद भी चलते रहे.
इसी वजह से मॉडिफाइड उड़ान में एयरपोर्ट बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय उड़ानों को लंबे समय तक चलाने पर भी जोर दिया गया है. सरकार ने अगले 10 साल में क्षेत्रीय रूट पर उड़ानें चलाने वाली एयरलाइंस को आर्थिक मदद देने के लिए 10043 करोड़ रुपये अलग रखे हैं.

प्रतीक्षा राणावत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 12 वर्षों का अनुभव है. इन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मल्टीमीडिया (B.Sc – Multimedia) में ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद जन संचार (Mass Communication) में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है. अपने करियर की शुरुआत इन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, लेकिन समय के साथ लेखन में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. वर्तमान में प्रतीक्षा बिजनेस और यूटिलिटी विषयों के लिए लेखन करती हैं. इसके अलावा इन्होंने लंबे समय तक एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर भी लिखा है. लिखने के साथ- साथ ही इन्हें ट्रैवलिंग, नई चीज़ों को एक्सप्लोर करना और किताबें पढ़ने का भी शौक है
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