देश के अलग-अलग राज्यों में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने रविवार को चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने इस कसरत के जरिए देश की लगभग 14 से 15 करोड़ आबादी को वोटर लिस्ट से “गायब” कर दिया है।
कुरैशी ने आयोग से सवाल किया कि जिस ‘अवैध प्रवासियों’ की पहचान के नाम पर यह पूरा अभियान शुरू किया गया था, आखिरकार उनकी गिनती कितनी निकली?
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में पूर्व सीईसी कुरैशी ने तंज कसते हुए कहा, “मैं चुनाव आयोग को भारत की लगभग 14-15 करोड़ आबादी को इस कसरत के जरिए बाहर करने का मुश्किल काम पूरा करने के लिए बधाई देना चाहता हूं। मुझे नहीं पता कि उन्हें कितने अवैध प्रवासी मिले, जो इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य था। दुख की बात है कि उन्होंने इस आंकड़े का खुलासा नहीं किया है।”
उन्होंने कहा, “मैं आयोग से अनुरोध करूंगा कि वे इस आंकड़े के साथ सामने आएं ताकि देश को पता चले कि आप कितने सफल रहे हैं। आपने वह कर दिखाया जो राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग भी नहीं कर सका। भारत की 15% आबादी को हटाकर आपने जनसंख्या नियंत्रण में बड़ा योगदान दिया है।”
कुरैशी ने दोहराया कि SIR अभियान की मंशा सही नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, चुनाव आयोग द्वारा दी गई कोई ‘खैरात’ या दान नहीं।
चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अक्टूबर 2025 में देश भर में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का ऐलान किया था।
वोटर लिस्ट को एरर फ्री बनाना, फर्जी या डबल एंट्री को हटाना, मृत मतदाताओं के नाम काटना और अवैध विदेशी नागरिकों को लिस्ट से बाहर करना। पलायन, दो जगह रजिस्ट्रेशन और वैरिफिकेशन के दौरान घरों का बंद मिलना।
हाल ही में महाराष्ट्र SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के बाद यह विवाद चरम पर पहुंच गया।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आंकड़ों के मुताबिक, 9.78 करोड़ कुल मतदाताओं में से केवल 7.71 करोड़ लोगों के ही फॉर्म एन्यूमरेशन (सत्यापन) चरण में जमा हो सके। यानी ड्राफ्ट लिस्ट में 2.07 करोड़ नाम (21.14%) कम हो गए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के जरिए महाराष्ट्र में रियल टाइम में ‘वोट चोरी’ की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 चुनावों के दौरान जोड़े गए लाखों वोटों के बाद अचानक इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं का गायब होना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।
आयोग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने का मतलब अंतिम निष्कासन नहीं है।
जिन पात्र नागरिकों के नाम अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted) या फॉर्म न जमा होने के कारण हटे हैं, वे 30 सितंबर 2026 तक फॉर्म 6 (Form 6) भरकर फिर से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
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