चीन से ज्यादा उम्मीद ठीक नहीं! क्या मोदी-जिनपिंग की वार्ता से LAC विवाद पर निकलेगा रास्ता? – livehindustan.com

चीन और भारत के बीच तनाव कभी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया। चीन की महत्वाकांक्षी नीयत के चलते उसपर ज्यादा भरोसा भी नहीं किया जा सकता है। सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता भी होने वाली है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटीनीति को ताक पर चढ़ा दिया है तब भारत के लिए बीजिंग के साथ भी संबंध बनाए रखना जरूरी है।
जानी-मानी पत्रकार बरखा दत्त ने अपने एक लेख में कहा कि पिछले महीने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहोयग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने चीन गए थे तो उनकी व्लादिमीर पुतिन और जिनपिंग के साथ तस्वीरों से पश्चिमी मीडिया में हलचल मच गई थी। पश्चिमी मीडिया ने इसे भारत और अमेरिका के बीच असहज संबंध भी बताया था। हालांकि चीन को लेकर लोगों के मन में आशंका बनी ही रहती है। उसकी नीयत का कोई भरोसा नहीं है।
उन्होंने अपनी नेपाल यात्रा का अनुभव बताते हुए कहा कि इतनी भयंकर आपदा आने के बाद भी चीन की संवेदनशीलता देखने को नहीं मिली। चीन ने भी स्वीकार किया है कि बाढ़ उसके इलाके से ही आई है। इसके बाद भी वह मदद के लिए सामने नहीं आया। वहीं नेपाल ने भी चीन के आगे सरेंडर करने से इनकार कर दिया और आपदा के बाद पूरी ताकत से राहत-बचाव में लग गया। चीन ने अपने यहां के मौत के सही आंकड़े भी जारी नहीं किए। कई दिन इंतजार करने के बाद उसने बताया कि 40 लोगों की मौत हुई है। वहीं नेपाल में कम से कम 1300 लोगें के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। बाढ़ की त्रासदी इतनी भयंकर थी कि चीन का गिरोंग इमिग्रेशन सेंटर ही बह गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन में कितने लोगों की मौत हुई होगी।
दत्त ने अपने लेख में कहा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत और चीन के बीच संबंध ठीक नहीं हैं। ऐसे में चीन से लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारियों को लेकर ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। वह अगर कोई फैसला लेगा भी तो केवल अपने स्वार्थ को बचाने के लिए ही लेगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आर्मी के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने भी कहा था कि पाकिस्तान तो स सिर्फ सामने से लड़ रहा है। उसे उकसाने और पूरा सहयोग करने में चीन लगा हुआ है।
उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान की सेना में ज्यादा तक उपकरण चीन के ही हैं। वह भारत के खिलाफ पाकिस्तान का भरपूर इस्तेमाल करता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन भारत का विरोध ही करता आया है। मामला सेना से जुड़ा हो या फिर आर्थव्यवस्था से जुड़ा, चीन भारत के खिलाफ खड़ा नजर आता है। चीन की ही वजह से आज पूर्वी लद्दाख में इतनी बड़ी तैनाती करनी पड़ी है। सियाचिन में अगर भारत को अपने सैनिकों को तैनात करना पड़ता है तो उसके पीछे वजह चीन ही है।
भारत और चीन के बीच व्यापार का अंतर बहुत ज्यादा है। 2025-26 में चीन ने भारत में 131.6 अरब डॉलर का व्यापार किया जबकि भारत ने चीन में 19.5 अरब डॉलर का ही किया है। भारत और चीन के बीच छोटे मुद्दों पर ही सहमति बन सकती है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप जी-3 के विजन को लेकर आगे चल रहे हैं जिसमें वह रूस और चीन को शामिल करना चाहते हैं। हालांकि यह बात कहनी आसान है लेकन धरातल पर उतरनी बेहद मुश्किल। जानकारों का कहना है कि भारत को आत्मनिर्भर बनकर आत्मरक्षा के सिद्धांत पर आगे बढ़ना चाहिए।
विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का ‘C सर्टिफिकेट’ भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News