Feedback
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार तक पुष्ट मामलों की संख्या सात हजार बाईस तक पहुंच गई है. मौतों का आंकड़ा 3398 हो चुका है. यह प्रकोप बुंडीबुग्यो नामक प्रजाति के वायरस से फैला है.
यह कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है. यह 2018-2020 के प्रकोप को पार कर गया है. विश्व स्तर पर यह 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीका के प्रकोप के बाद दूसरा सबसे बड़ा है जिसमें 28 हजार से अधिक मामले और 11 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं.
यह प्रकोप मई 2026 में इटुरी प्रांत में आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनवरी से ही शुरू हो चुका था. अब तक यह सात प्रांतों में फैल चुका है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि वायरस दक्षिण उबांगी प्रांत तक पहुंच गया है. यह प्रांत देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और प्रकोप के मुख्य केंद्र से काफी दूर है. यह कांगो गणराज्य और मध्य अफ्रीकी गणराज्य से सीमा साझा करता है.
वायरस कैसे नए प्रांत में पहुंचा
दक्षिण उबांगी में पहला मामला तेईस वर्षीय युवक का पाया गया. वह मंगलवार को मर चुका था. उसकी जांच में बुंडीबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई. वह जुलाई में दक्षिण किवु प्रांत से निकला था. कुछ समय विदेश में बिताने के बाद वह वापस कांगो आया और दक्षिण उबांगी पहुंचा. स्वास्थ्य अधिकारियों ने संपर्क ट्रेसिंग शुरू कर दी है. 
इस प्रांत का पहले के प्रभावित क्षेत्रों से कोई सीधा सीमा संबंध नहीं है. इससे स्पष्ट होता है कि वायरस यात्रा और आवागमन के जरिए दूर तक फैल सकता है. इटुरी अभी भी सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांत है. नॉर्थ किवु और हाउट-उएले में भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कुल 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में वायरस सक्रिय है.
केस फैटलिटी रेट लगभग अड़तालीस प्रतिशत है. यानी लगभग आधे संक्रमित लोग मौत के शिकार हो रहे हैं. 1671 लोग ठीक भी हो चुके हैं लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण से बाहर दिख रही है.
बुंडीबुग्यो वायरस की खासियत और चुनौतियां
बुंडीबुग्यो इबोला की एक दुर्लभ प्रजाति है. इसके लिए अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है. कुछ उम्मीदवार वैक्सीन विकसित हो रहे हैं लेकिन वे अभी ट्रायल चरण में हैं. पहले वाले जेयर प्रजाति के लिए उपलब्ध वैक्सीन सीमित रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं लेकिन ये बुंडीबुग्यो पर पूरी तरह प्रभावी नहीं माने जाते.
वायरस शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है. बुखार, उल्टी, दस्त और आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण पैदा करता है.प्रतिक्रिया में कई बाधाएं हैं. प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी है. भागीदार और फंडिंग भी पर्याप्त नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ये कमी भौगोलिक विस्तार को रोकने में बाधा बन रही है. 
कई मौतें इलाज केंद्रों के बाहर हो रही हैं. समुदाय में प्रतिरोध, सुरक्षा की समस्या और आबादी का विस्थापन भी चुनौती बढ़ा रहा है. युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की पहुंच मुश्किल है.
पिछली महामारियों से तुलना और वैश्विक चिंता
2018-2020 के कांगो प्रकोप में करीब तीन हजार चार सौ मामले और दो हजार दो सौ मौतें हुई थीं. मौजूदा प्रकोप उससे कहीं बड़ा हो चुका है. पश्चिम अफ्रीका के 2014-2016 प्रकोप ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया था. अब कांगो का यह प्रकोप उसी स्तर की चिंता पैदा कर रहा है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक मामले आधिकारिक आंकड़ों से तीन गुना तक हो सकते हैं क्योंकि निगरानी व्यवस्था कमजोर है.
पड़ोसी देशों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है. कुछ मामले युगांडा और अन्य जगहों पर भी रिपोर्ट हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन मदद कर रहे हैं लेकिन संसाधन सीमित हैं. वैक्सीन अभियान शुरू किए गए हैं लेकिन स्टॉक जल्दी खत्म हो रहा है. संपर्क ट्रेसिंग और सुरक्षित अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं तेज करने की जरूरत है.
इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए तुरंत अधिक स्टाफ, फंड और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत है. समुदाय को जागरूक करना बहुत जरूरी है ताकि लोग लक्षण दिखते ही इलाज लें और संपर्कों को छिपाएं नहीं. स्वास्थ्य क्षेत्रों में आइसोलेशन यूनिट बढ़ानी होंगी. शोधकर्ताओं को बुंडीबुग्यो विशिष्ट वैक्सीन और उपचार पर तेजी से काम करना चाहिए.
कांगो की सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा. असुरक्षित क्षेत्रों में पहुंच सुनिश्चित करनी होगी. अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए तो प्रकोप और फैल सकता है. यह न सिर्फ कांगो बल्कि पूरे अफ्रीका और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खतरा है. दुनिया को इस संकट को गंभीरता से लेना चाहिए. मौजूदा आंकड़े पहले ही चेतावनी दे चुके हैं. अब कार्रवाई का समय है ताकि और जानें न जाएं.
यह प्रकोप हमें याद दिलाता है कि संक्रामक रोगों की निगरानी और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है. कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था वाले क्षेत्रों में वायरस तेजी से फैलता है. वैश्विक सहयोग ही इसे रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है. कांगो के लोग इस संकट से जूझ रहे हैं. उनकी मदद के लिए ठोस प्रयास जारी रखने होंगे.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू