आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग ने राजभाषा पखवाड़ा के तहत काव्य-संगम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कहा कि हिंदी सिर्फ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा नहीं है। यह देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी असर डालती है।
प्राचार्या प्रो. अर्चना पाठक ने अतिथियों और कवियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कवि हर विषय पर अपनी बात रखते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत चीफ प्रॉक्टर डॉ. रंजना त्रिपाठी ने की। इसका संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया, जबकि धन्यवाद डॉ. मुदिता तिवारी ने दिया।
इस काव्य-संगम में कई कवियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। मिस्बाह इलाहाबादी ने ‘लेकिन आंखों में फिर अश्क-ए-गम आ गए’ कविता सुनाई। अखिलेश द्विवेदी ने ‘कोई परिचय नहीं तुमसे मगर संबंध पक्का है’ और शरद मिश्रा ने ‘मेरे सुख की कोई दुआ न करो’ जैसी रचनाएं पेश कीं।
अशोक बेशरम ने ‘सावन के कजरी झुलना और फागुन के तान है हिंदी’ कविता पढ़ी। तरन्नुम नाज ने ‘मोहब्बत से यह दुनिया चल रही है, आर्य कन्या में कन्या का सम्मान है’ प्रस्तुत किया। प्रीता वाजपेई ने ‘अगर हम चाह लें तो पर्वतों के पार उड़ जाएं’ जैसी कविता सुनाई।
डॉ. आभा मधुर ने ‘भावना में कल्पना में सजे तो प्रीत हो जाए’ कविता सुनाई। शिल्पी सक्सेना ने ‘मेरी स्याही के हर अक्षर में हिंदुस्तान हो जाए’ कविता पढ़ी। इन सभी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में लॉ डायरेक्टर डॉ. ममता गुप्ता, उप प्राचार्या प्रो. इभा सिरोठिया, डीन प्रो. अंजू श्रीवास्तव, डॉ. श्रुति आनंद, डॉ. शशि कुमारी, डॉ. अमित, डॉ. सुधा कुमारी, डॉ. दामिनी और डॉ. शिवानी मौजूद थीं। इनके अलावा, सभी शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्राएं भी उपस्थित रहीं।
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