शी चिनफिंग के शाही स्वागत के बदले क्या चाहते हैं ट्रंप? ड्रैगन-अमेरिका की जुगलबंदी की पूरी कहानी – Jagran

कभी चीन के खिलाफ आग उगलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप आज शी चिनफिंग के आवभगत लगे हुए हैं। सवाल है कि आखिर ट्रंप इसके बदले चाहते क्या हैं?
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का अमेरिका दौरा।
ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का किया ‘शाही स्वागत’।
यह स्वागत अमेरिकी दबावों और चीन की बढ़ती शक्ति का परिणाम।
दोनों महाशक्तियों के बीच जटिल कूटनीतिक संतुलन का नया दौर।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। वैश्विक कूटनीति के पन्नों पर इन दिनों एक ऐसी हैरान करने वाली घटना दर्ज हुई, जिसने पूरी दुनिया को गहरी सोच में डाल दिया है। हमेशा चीन को आड़े हाथों लेने और उसके खिलाफ आग उगलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जब अपने सबसे बड़े भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अमेरिका आने पर उनका ‘शाही अंदाज’ में स्वागत किया, तो कूटनीतिक गलियारों में भूचाल आना लाजिमी था।
बीते मई महीने में बीजिंग की अपनी यात्रा के दौरान बिना किसी प्रोटोकॉल या प्रेस कॉन्फ्रेंस के खाली हाथ लौटने वाले ट्रंप का वॉशिंगटन में चिनफिंग के सामने यह अंदाज बिल्कुल अलग दिखा, जिसने वैश्विक कूटनीति का समीकरण पूरी तरह से बदलकर रख दिया। 
ऐसे में अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि चीन के खिलाफ हमेशा से तीखे तेवर दिखाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने चिनफिंग को शाही स्वागत देकर कौन सी नई चाल चली है? क्या यह अमेरिका की मजबूरी है या किसी बड़े सौदे का संकेत? आखिर इसके बदले क्या चाहते हैं ट्रंप?
गौर करने वाली बात यह है कि एक दशक बाद अमेरिकी जमीन पर उतरे शी चिनफिंग का स्वागत करने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयूज ज्वाइंट बेस की रनवे पर पहुंचे। अमूमन अमेरिका विदेशी राष्ट्रप्रमुखों की अगवानी व्हाइट हाउस में करता है, लेकिन इस बार ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति का शाही अंदाज में स्वागत किया। 
अच्छा, वॉशिंगटन का यह नजारा मई में ट्रंप की बीजिंग यात्रा के ठीक उलट है, जहां शी चिनफिंग उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं आए थे और बिना किसी बड़े समझौते या साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के ट्रंप को खाली हाथ लौटना पड़ा था। जब आधार ये बन रहा है तो सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर चार महीनों में ऐसा क्या बदल गया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच कूटनीति के तेवर बदल चुके हैं? 
Xi Jinping's US visit
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस समय देश के भीतर ईरान के साथ चल रहे युद्ध और उससे उपजी जनता की नाराजगी का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में ट्रंप चीन के तेजी से बढ़ते कद को लेकर अमेरिकी जनता में बढ़ रही बेचैनी को शांत करना चाहते हैं।
हालांकि इस बात में भी कोई दोराय नहीं है कि ट्रंप को इस समय मजबूत वैश्विक छवि और बेहतरीन ‘ऑप्टिक्स’ की जरूरत है ताकि वह घरेलू जनता को यह दिखा सकें कि वह दुनिया के सबसे ताकतवर नेता के साथ बराबरी पर खड़े हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले एक दशक में जबरदस्त तरक्की की है। हालांकि अमेरिका आज भी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन बड़ा बदलाव यह है कि अब चीन के पास अमेरिका को टक्कर देने की ताकत और उसका इस्तेमाल करने का हौसला दोनों आ चुके हैं।
इसकी वजह यह है कि पिछले साल जब ट्रंप ने चीन पर 125 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ लगाया था, तो ड्रैगन ने भी पीछे हटने के बजाय ठीक वैसा ही कदम उठाया। इसके अलावा, चीन के पास स्मार्टफोन से लेकर फाइटर जेट तक में काम आने वाले ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की प्रोसेसिंग का लगभग एकाधिकार है, जिसके जरिए उसने अमेरिका को झुकने पर मजबूर कर दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी चिनफिंग इस बैठक में तवान पर चीन के दावे का मुद्दा उठा सकते हैं, जिस पर अमेरिका बात करने से बचना चाहता है। वहीं, ट्रंप चीन की आपत्तियों के बावजूद कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल जारी रख सकते हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि अमेरिका ने पहले ही घोषणा कर दी है कि चीन के साथ व्यापारिक युद्धविराम अगले साल की शुरुआत तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, एआई के बढ़ते खतरों और प्रतिस्पर्धा पर भी दोनों देश बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं।
अच्छा, खास बात यह भी है कि चिनफिंग के इस यात्रा के दौरान होने वाले स्टेट डिनर में दुनिया की दिग्गज कंपनियों के मुखिया, जैसे ऐपल के जॉन टर्नस, एनवीडिया के जेनसेन ह्वांग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन शामिल होंगे। यह दुनिया को यह संदेश देने के लिए है कि दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री चीन और सबसे बड़े उपभोक्ता अमेरिका के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद स्थिरता बनी रह सकती है।
Xi Jinping's visit to the US (2)
दूसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या चीन ईरान के साथ चल रहे गतिरोध को तोड़ने में अमेरिका की मदद करेगा? इस सवाल का जबाव फिलहाल नहीं मिला है। हालांकि ट्रंप चीन में हिरासत में लिए गए कुछ अमेरिकियों की रिहाई की मांग भी जोर-शोर से उठा रहे हैं।
गौरतलब है कि इस पूरी मुलाकात का सबसे दिलचस्प पहलू दोनों नेताओं की अपनी-अपनी सोच है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि समय के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। इसके विपरीत, शी चिनफिंग का मानना है कि अमेरिका अब ढलान पर है और वक्त चीन के पक्ष में है।
बहरहाल, संभावना इस बात की बहुत तेज है कि इस बार दोनों देश कोई साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय अपने-अपने घरेलू दर्शकों को लुभाने के लिए अलग-अलग घोषणाएं करेंगे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि तनावपूर्ण समय के बीच ट्रंप और चिनफिंग की यह मुलाकात इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक राजनीति अब एकतरफा नहीं रही, बल्कि दो महाशक्तियों के बीच एक नए और जटिल संतुलन की ओर बढ़ रही है।
यह भी पढ़ें- 100 फीट लंबा लाल कालीन… आसमान में B1 बॉम्बर्स; अमेरिका में शी चिनफिंग के शाही स्वागत के मायने समझिए

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News