हम पाकिस्तान में ही अपने कुछ अधिकार चाहते हैं: पाकिस्तान के दलित हिंदू तो पलायन करके भारत भी नहीं आ सकते! – Dainik Bhaskar

यह मेरे लिए बहुत अचरज की बात थी, जब मैं दैनिक भास्कर के इस कॉलम के एक पाठक से पाकिस्तान में मिला। पिछले हफ्ते मैं अपने एक दोस्त की बेटी की शादी में शामिल होने कराची गया था।
मेजबान ने मुझे एक हिंदू महिला के बारे में बताया। कहा कि वह आपसे मिलना चाहती हैं। उस महिला ने मेरा अभिवादन ‘नमस्ते’ और ‘अस्सलाम-ओ-अलैकुम’ से किया। मैंने भी उन्हीं शब्दों में जवाब दिया।
फिर उन्होंने कहा, ‘मैं पाकिस्तान के पहले हिंदू एएसपी राजिंदर मेघवार की रिश्तेदार हूं। मैंने आपके कॉलम में उनके बारे में पढ़ा था, जो कुछ हफ्ते पहले ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित हुआ था।’
वे महिला इंटरनेट पर हिंदी अखबारों की नियमित पाठक हैं। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने हिंदी कहां से सीखी। वे मुस्कुराईं और बताया कि उन्होंने कई साल पहले इस्लामाबाद की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मॉडर्न लैंग्वेज से हिंदी सीखी थी।
यह मेरे लिए एक और चौंकाने वाली बात थी। मैं इस्लामाबाद में रहता हूं और मुझे ही पता नहीं था कि यहां की किसी यूनिवर्सिटी में हिंदी विभाग भी है। वह महिला एक स्कूल टीचर हैं। असल में वह मुझे यह बताना चाहती थीं कि वह और उनके भतीजे राजिंदर मेघवार दलित परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
पाकिस्तान में ईसाइयों के बाद हिंदू दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है। हिंदू समुदाय को आधिकारिक तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है- हिंदू जाति और अनुसूचित जाति, जिसे दलित भी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि हिंदू जाति के लोग आर्थिक रूप से बहुत मजबूत है, क्योंकि वे अच्छी तरह शिक्षित हैं, लेकिन हिंदू दलित ज्यादातर गरीब और अशिक्षित हैं। उनके भतीजे राजिंदर मेघवार जरूर एक अपवाद हैं, जो कड़ी मेहनत और कमिटमेंट से एएसपी बनने में सफल रहे। ज्यादातर पाकिस्तानी दलितों के पास शिक्षा की बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं।
उन्होंने मुझसे पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू दलितों की दिक्कतों को उजागर करने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि संसद में भी पाकिस्तानी दलितों की कोई आवाज नहीं है, क्योंकि सभी हिंदू सांसद उच्च जातियों से संबंधित हैं।
उन्होंने दावा किया कि आर्थिक रूप से समृद्ध हिंदू परिवारों के पास भारत जाने के साधन हैं, लेकिन पाकिस्तानी दलितों के पास तो इतने भी संसाधन नहीं हैं कि वे भारत जा सकें।
उस हिंदू महिला ने मुझसे अपना नाम उजागर न करने की गुजारिश की। उन्होंने मुझसे पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) द्वारा प्रकाशित नवीनतम रिपोर्ट पढ़ने को भी कहा, जिसमें पाकिस्तानी हिंदुओं के भारत में पलायन के बारे में बताया गया है।
हालांकि उस महिला ने कहा, ‘हम भारत नहीं जाना चाहते क्योंकि हम गरीब हैं। अगर हम भारत चले भी जाएं तो वहां भारतीय नागरिकता पाने के लिए हमारे पास कोई संपर्क या साधन नहीं होंगे। हम केवल पाकिस्तान में ही अपने कुछ अधिकार चाहते हैं।’
मैंने उनसे पूछा कि वह क्या चाहती हैं। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तानी दलित लड़कियों की सुरक्षा चाहते हैं। उनका अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन बंद होना चाहिए। इसके अलावा पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 25 ए सभी पाकिस्तानियों को उनकी धार्मिक पहचान से परे मुफ्त शिक्षा का अधिकार देता है।
वह चाहती थीं कि दलित जातियों के बच्चों को कम से कम 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाए। शादी में बहुत सारे मेहमान होने की वजह से हमारी बातचीत में बार-बार व्यवधान आता रहा, लेकिन मैंने उनसे वादा किया कि मैं निश्चित ही मानवाधिकार आयोग की वह रिपोर्ट पढूंगा, जिसका उन्होंने जिक्र किया था। इस कार्यक्रम के मेजबान ने मुझे बताया कि यह महिला उनकी बेटी की स्कूल टीचर रही हैं।
इस्लामाबाद वापस आने के बाद मैंने पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग से संपर्क किया। उन्होंने मुझे पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की समस्याओं पर अपनी नई फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट प्रदान की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंध में हिंदू समुदाय भारत से जुड़े घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया की वजह से भी समस्याओं का सामना कर रहा है। राम मंदिर के कारण सिंध के हिंदू पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए। कई अमीर हिंदुओं ने धमकियां मिलने के बाद भारत पलायन कर लिया।
आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘सिंध में हिंदू महिलाएं लगातार उत्पीड़न, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की धमकियों का सामना करती हैं और इनमें भी ‘अनुसूचित जाति की हिंदू महिलाएं विशेष रूप से असुरक्षित हैं, क्योंकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है।’
यह रिपोर्ट सिंध के हिंदू समुदायों के साथ इंटरव्यूज पर आधारित है और खुलासा करती है कि 2019 में भारतीय सरकार द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), जिसे 2024 में लागू किया गया, की वजह से उच्च जाति के हजारों पाकिस्तानी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का एक त्वरित रास्ता मिल गया है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 5,000 से अधिक पाकिस्तानी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता मिली और 12,000 आवेदन अभी भी लंबित हैं। पाकिस्तानी हिंदुओं की कुल आबादी 55 लाख से अधिक है।
उनमें से सभी भारतीय नागरिकता नहीं पा सकते। यह पाकिस्तान और भारत दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है कि अगर संभव हो तो किसी संयुक्त तंत्र के माध्यम से उनकी सुरक्षा और भले के लिए कदम उठाए जाएं।
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