मुंबई में CJP प्रदर्शन के दौरान सरकार की संयम नीति ने हिंसा टाल दी। राजनीतिक संकट से घिरी फडणवीस सरकार …और पढ़ें
मुंबई में सीजेपी का विरोध प्रदर्शन।
मुंबई में CJP का मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन।
फडणवीस सरकार ने शांतिपूर्ण तरीके से संभाला हजारों की भीड़ को।
पुलिस ने संयम बरतते हुए टकराव को सफलतापूर्वक टाला।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। शुक्रवार 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई दोनों जगहों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
अब एक तरफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
इस दोनों घटनाक्रम में मांग भलेही एक थी, लेकिन इसका सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू यह रहा कि दिल्ली सरकार के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने एक बेहद परिपक्व और गैर-टकराव वाला रुख अपनाया। ऐसे में सवाल यह है कि प्रदर्शन को लेकर महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार की क्या रणनीति रही और इसके सियासी मायने क्या है? आइए जानते हैं।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि महाराष्ट्र सरकार के इस खास रणनीति को लेकर राजनीतिक पंडितों की अलग-अलग राय है। हालांकि इसमें गौर करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार इस समय पहले से ही सूखे की गंभीर समस्या, MPSC के खिलाफ चल रहे छात्रों के प्रदर्शन और आदिवासी छात्रों के आंदोलनों जैसे कई मोर्चों पर घिरी हुई है।
ऐसे में सरकार कोई नया विवाद मोल लेकर अपनी छवि को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती थी। यही वजह थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर हजारों की भीड़ जुटने के बावजूद सरकार ने संयम बरता और सख्ती नहीं बरती गई।
अच्छा, इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि सीएम फडणवीस ने इसके लिए खुद पुलिस को निर्देश दए थे। एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को पूरी छूट दी थी कि यदि प्रदर्शन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है, तो अनावश्यक बल प्रयोग न किया जाए।
अब बात दिल्ली से तुलना की करें तो, चाहे वो कल यानी शुक्रवार का विरोध प्रदर्शन हो या फिर जुलाई का। दोनों समय में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन में हिंसा और भारी टकराव देखने को मिला था। इसके विपरीत, मुंबई में पुलिस ने बिना किसी आक्रामकता के स्थिति को संभाला गया।
दूसरी तरफ अहम बात यह है कि बिना पुलिस अनुमति के आयोजित इस प्रदर्शन में दोपहर तक लगभग 9000 से 10000 लोग शिवाजी पार्क के पास जमा हो चुके थे। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए मुंबई पुलिस ने 1000 से 1500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था।
पुलिस ने भीड़ को शिवाजी पार्क के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया, जिससे स्थानीय लोगों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाया गया। इसके अलावा असुविधा से बचने के लिए आसपास की सड़कों को ‘जीरो पार्किंग’ जोन घोषित कर दिया गया और भीड़ को सड़क किनारे ही नियंत्रित रखा गया।
हालांकि, सरकार के इस रणनीति के इतर, भाजपा के वरिष्ठ मंत्री आशीष शेलार ने इस विरोध प्रदर्शन तीखी आलोचना करते हुए इसे अराजकता का व्याकरण करार दिया, लेकिन CJP के नेता अभिजीत दिपके ने मुंबई पुलिस की जमकर तारीफ की।
अभिजीत दिपके ने मंच से मुंबई पुलिस को देश का सबसे बेहतरीन पुलिस बल बताया और उन्हें अनूठे अंदाज में सराहा। उन्होंने साफ कहा कि मुंबई पुलिस, दिल्ली पुलिस की तरह आक्रामक नहीं थी।
गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन और सरकार राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दें, तो बड़े से बड़े आंदोलनों को भी बिना किसी हिंसा या अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संभाला जा सकता है। जहां एक तरफ राजनीतिक दल अपनी बात रखने में सफल रहे, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने भी अपनी सूझबूझ से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया।