मिडिल ईस्ट में लंबे इंतजार के बाद आई शांति कितने दिन की? नाजुक मोड़ पर पहुंची इजरायल-हमास की डील, अब क्या करेगा अमेरिका – Aaj Tak

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मिडिल ईस्ट लंबे समय से तनाव, अशांति और हिंसा से जूझ रहा है. वजह है एक युद्ध जिसकी शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी. हमास ने इजरायल पर रॉकेट दागे और जवाब में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने जंग का ऐलान कर दिया. इस जंग ने कई जिंदगियां और परिवारों को तबाह कर दिया. हजारों की जान चली गई और सैकड़ों अपने परिवार से बिछड़ गए. दोनों ही पक्षों ने बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बना लिया जिन्हें लंबे वक्त से घर वापसी का इंतजार है.
अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद यह इंतजार खत्म होता दिख रहा है. दोनों पक्षों के बीच एक युद्ध विराम समझौता हुआ जिसकी शुरुआत बंधकों की रिहाई से हई. लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं है. समझौते के कुछ दिनों के भीतर ही दोनों पक्ष एक-दूसरे पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं. इससे विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि यह समझौता, जिसे लंबे समय बाद और अथक प्रयासों से हासिल किया गया, आखिर कितने दिन टिक सकेगा.
समझौते में आया नाजुक मोड़
इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम समझौते में शनिवार को एक नाजुक मोड़ आ गया. इजरायल ने हमास पर एक बंधक को रोककर रखने का आरोप लगाया जिसके बाद गाजा के नागरिकों की वतन वापसी को भी रोक दिया गया. इस समझौते को पहले से ही ‘कमजोर’ या ‘अस्थायी’ कहा जा रहा था. इजरायल की ओर से इसे ‘फ्रेमवर्क’ कहा जा रहा था, न कि एक ठोस समझौता, जो इस डील की अस्थिरता को और साफ करता है. अतीत में भी इजरायल और हमास के बीच एक समझौता विफल हो चुका है.
ट्रंप के आते ही मानों कई महीनों से सुलग रहा मिडिल ईस्ट अचानक शांत होने लगा. लेकिन शनिवार से तनाव एक बार फिर तब बढ़ गया है, जब इजरायल ने कहा कि 29 वर्षीय अर्बेल येहुद, जिन्हें शनिवार को रिहा होना था, वह हमास की कैद से छूटीं चार महिलाओं में शामिल नहीं थीं. नतीजतन इजरायल ने गाजा के नागरिकों को नेटजारिम कॉरिडोर से उत्तर की ओर लौटने की इजाजत नहीं दी, जो संघर्ष विराम और बंधक समझौते के तहत शनिवार को होना था.
नहीं रिहा हुई इजरायल की येहुद
हालात और जटिल तब हो गए जब पता चला कि येहुद को हमास के बजाय एक और फिलिस्तीनी उग्रवादी संगठन, इस्लामिक जिहाद (PIJ) ने बंधक बना रखा था. PIJ के एक वरिष्ठ सदस्य ने CNN को बताया कि येहुद उनके कब्जे में है और उसे ‘बंधक समझौते के तहत’ रिहा किया जाएगा. पहले से हमास और इजरायल दोनों एक-दूसरे पर समझौते का पालन न करने का आरोप लगा रहे थे. अब यह सवाल उठने लगा है कि यह युद्ध विराम, जो 15 महीने से अधिक समय के बाद अस्तित्व में आया है, कितने दिन और चलेगा.
शनिवार को एक और वाकया हुआ. इजरायल के सैनिकों ने गाजा के नागरिकों पर गोलियां चलाईं, जो अपने घरों की ओर लौटने की कोशिश कर रहे थे. इजरायली सेना ने इसे ‘वॉर्निंग शॉट्स’ बताया. लेकिन CNN की फुटेज में देखा गया कि सैकड़ों लोग डर के मारे भाग रहे थे. इजरायली सेना का कहना था कि इस घटना में किसी प्रकार की हानि की कोई सूचना नहीं है.
दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर
हमास ने इजरायल पर युद्ध विराम समझौते और बंधक विनिमय की शर्तों को लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि इजरायल अल-रशीद स्ट्रीट को बंद करके और नागरिकों को दक्षिण से उत्तर की ओर लौटने से रोककर समझौते की शर्तों को लागू न करके सिर्फ समय बर्बाद कर रहा है. हमास ने यह भी कहा है कि किसी भी देरी के लिए इजरायल जिम्मेदार है और इससे समझौते के बाकी चरणों पर असर पड़ सकता है.
क्या होगी अमेरिका की प्रतिक्रिया?
इन घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि अमेरिका, विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इन उल्लंघन पर किस तरह से प्रतिक्रिया देंगे. इजरायल ने ट्रंप प्रशासन से यह अनुरोध किया था कि वह हमास पर दबाव डालकर येहुद को रिहा कराए. इस संदर्भ में इजरायल ने ट्रंप के मिडिल ईस्ट के विशेष दूत, स्टीव विटकोफ से संपर्क किया था. CNN ने इस पर ट्रंप प्रशासन से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है.
सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस और रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के डॉ. एचए हेलियर ने कहा कि युद्ध विराम समझौता शुरू से ही कमजोर था. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देखना होगा कि इजरायल और हमास दोनों ही ओर से उल्लंघनों के बाद अमेरिकी प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या यह समझौता जल्द ही टूट जाएगा. उनका कहना था कि सवाल उठता है कि दोनों पक्षों द्वारा उल्लंघनों के बाद अमेरिका इन सब पर किस तरह से प्रतिक्रिया देगा और इस संघर्ष विराम का भविष्य क्या है.
हमास के प्रोपेगेंडा वीडियो
दूसरे बंधक और कैदी विनिमय के दौरान, हमास ने इस अवसर का इस्तेमाल एक शक्तिशाली प्रदर्शन के रूप में किया. हमास की ओर से जारी किए गए एक प्रोपेगेंडा वीडियो में चार इजरायली महिलाओं को गाजा शहर में भीड़ के सामने दिखाया गया, जहां उन्होंने रिहाई के सर्टिफिकेट हासिल किए. वीडियो में ये महिलाएं मुस्कराते हुए और पोज देते हुए दिखाई दीं. उन्होंने हमास की सैन्य शाखा, अल कसाम ब्रिगेड का आभार जताया. उनका कहना था कि उन्हें अच्छे तरीके से रखा गया, उन्हें खाना और पानी दिया गया और बमबारी से उनकी सुरक्षा की गई.
यह वीडियो हमास की प्रोपेगेंडा स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, जो पहले भी इस तरह की वीडियो का इस्तेमाल कर चुका है. अक्टूबर 7, 2023 को हामास द्वारा किए गए हमले के बाद की वीडियो में इन महिलाओं को आम नागरिकों के कपड़ों में, घायल और भयभीत दिखाया गया था. हमास के इस प्रकार के प्रोपेगेंडा वीडियो अक्सर चर्चा का कारण बनते हैं और स्थिति को और जटिल बना देते हैं.
समझौते की राह में रोड़े
विशेषज्ञों का मानना है कि हमास के साथ कोई भी समझौता जटिलताओं से भरा होता है. विशेष रूप से जब हमास अपनी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा हो, उधर इजरायल बंधकों को वापस लाने और हमास को खत्म करने की कोशिश कर रहा हो. तेल अवीव के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (INSS) के वरिष्ठ शोधकर्ता योहानन टज़ोरेफ ने कहा कि हमास जैसे संगठन के साथ किसी भी समझौते में ऐसे उल्लंघन और देरी की आशंका बनी रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चली आ रही हिंसा और संघर्ष से जुड़ी हुई है और अक्टूबर 7 के हमले ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है.
इजरायल के सामने उलझन
इजरायल के लिए यह एक बड़ी उलझन है कि वह बंधकों को कैसे सुरक्षित रूप से रिहा कराए और साथ ही हमास को पूरी तरह से खत्म भी करे. इजरायल का कहना है कि येहुद की वापसी समझौते का एक अहम हिस्सा है, जबकि हमास अपनी तरफ से ताकत का इस्तेमाल कर रहा है और बंधकों के बदले कुछ और हासिल करने की कोशिश कर रहा है.
‘कुछ भी मुफ्त में नहीं देगा हमास’
इजरायल के पूर्व बंधक वार्ताकार गर्शन बास्किन ने कहा कि हमास ‘कुछ भी मुफ्त में नहीं देगा’ और इजरायल के द्वारा विस्थापित लोगों को उत्तर की ओर जाने से रोकने की धमकी देने से हमास पर कोई दबाव नहीं बनेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने अपनी धमकी को लागू किया तो इससे बंधकों की रिहाई में रुकावट आ सकती है. उन्होंने इजरायल को यह सलाह दी कि वह समझौते को जिंदा रखने के लिए मध्यस्थों को ज्यादा भूमिका निभाने दे.
आखिर में यह सवाल उठता है कि यह युद्ध विराम समझौता, जो बेहद कठिन प्रयासों से हासिल हुआ था, कितने दिन टिकेगा. दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप और हमलों से स्थिति लगातार मुश्किल होती जा रही है और मिडिल ईस्ट का आने वाला कल कैसा होगा, यह अब भी भविष्य के गर्त में है.
 
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