Yuvraj Singh
Date: 05-10-26 16:53
Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान देवी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति से भी जुड़ा है. शरद ऋतु में पड़ने के कारण इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है.
नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग तरह के फूल, फल, मिठाई और भोग अर्पित करते हैं. हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी की पूजा में हर वस्तु का इस्तेमाल नहीं किया जाता. कुछ चीजों को मां दुर्गा को अर्पित करना वर्जित माना गया है. ऐसे में अगर आप भी इस नवरात्रि घर में मां दुर्गा की पूजा करने जा रहे हैं तो यह जानना जरूरी है कि किन चीजों को पूजा सामग्री में शामिल नहीं करना चाहिए.
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. इसी दिन घटस्थापना के साथ नौ दिवसीय नवरात्रि पर्व का शुभारंभ होगा. घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय बताया गया है. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. इस वर्ष दुर्गा अष्टमी और महानवमी 19 अक्टूबर, सोमवार को ही पड़ेंगी. नवरात्रि के नौ दिनों के बाद विजयदशमी यानी दशहरा के साथ इस पर्व का समापन होगा.
मां दुर्गा को तुलसी के पत्ते क्यों नहीं चढ़ाए जाते?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा की पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते हैं. मान्यता है कि देवी के चंडिका स्वरूप की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल उचित नहीं माना गया है. इसलिए नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को पूजा सामग्री में तुलसी के पत्ते शामिल करने से बचना चाहिए.
धतूरा और मदार के फूल न चढ़ाएं
धतूरा और मदार यानी आक के फूल भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें मां दुर्गा को अर्पित नहीं करना चाहिए. नवरात्रि में देवी को ऐसे फूल चढ़ाने की परंपरा नहीं है, इसलिए पूजा के दौरान इनसे परहेज किया जाता है.
कनेर और केतकी के फूल भी माने जाते हैं वर्जित
मां दुर्गा की पूजा में कनेर और केतकी के फूलों को भी अर्पित करने से बचने की मान्यता है. नवरात्रि में देवी को लाल गुड़हल जैसे फूल चढ़ाने की परंपरा अधिक प्रचलित है. पूजा में हमेशा स्वच्छ और ताजे फूलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
मां दुर्गा को बासी या सड़े फल न चढ़ाएं
देवी-देवताओं की पूजा में भोग की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. मां दुर्गा को हमेशा ताजे और साफ फल ही अर्पित करने चाहिए. कटे हुए, बासी, सड़े-गले या जमीन पर गिरे हुए फलों को भोग में शामिल करना उचित नहीं माना जाता. इसलिए नवरात्रि पूजा के दौरान भोग की सामग्री की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.
तामसिक भोजन से भी करें परहेज
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा में सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्याज और लहसुन से बनी चीजों या अन्य तामसिक भोजन को देवी को भोग के रूप में नहीं चढ़ाना चाहिए. माता को फल, मिठाई, हलवा, खीर और अन्य सात्विक खाद्य पदार्थों का भोग लगाया जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में पूजा-पाठ के दौरान नियमों और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. हालांकि अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में पूजा की विधि और मान्यताओं में अंतर भी देखने को मिलता है. इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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