Shreeom Singh
Date: 10-10-26 08:02
Su-57 Fighter Jets: रूस ने एक बार फिर भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57E स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया है. इस बार रूस ने भारत में ही इन विमानों के निर्माण की पेशकश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस चाहता है कि भारत सिंगल-सीटर और ट्विन-सीटर वेरिएंट मिलाकर कुल 140 विमानों का ऑर्डर दे. इसके लिए HAL के नासिक प्लांट में Su-57 की प्रोडक्शन लाइन लगाने का प्रस्ताव दिया गया है. यह प्लांट फिलहाल Su-30MKI लड़ाकू विमानों के निर्माण से जुड़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार, Su-30MKI के 12 विमानों की सप्लाई पूरी होने के बाद मौजूदा प्रोडक्शन लाइन को Su-57 के निर्माण के लिए बदला जा सकता है. इसके लिए HAL को करीब 50 से 60 फीसदी नई मशीनों और उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है. रूस कम से कम 140 विमानों की डील चाहता है, ताकि इस प्रोजेक्ट में होने वाले निवेश की लागत वसूल की जा सके.
भारत के फैसले पर टिकी नजरें
रूस ने Su-57 के पुराने प्रोटोटाइप को ट्विन-सीटर विमान में बदलने के बाद उसकी टेस्टिंग शुरू कर दी है. भारतीय वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए इस वेरिएंट को अहम माना जा रहा है. Su-30MKI की तरह इसमें भी दूसरे क्रू सदस्य की भूमिका हो सकती है, जो हथियारों के संचालन में मदद करेगा. इसके अलावा, वह ड्रोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम कर सकता है.
भारत को तय करना होगा कि वह सिंगल-सीटर विमान खरीदेगा या ट्विन-सीटर वेरिएंट को चुनेगा. इन विमानों को भविष्य में लंबी दूरी के हमलों और ड्रोन के साथ मिलकर अभियान चलाने के लिए भी तैयार किया जा सकता है.
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंजन का भी ऑफर
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने इस प्रोजेक्ट में 60 फीसदी तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) की पेशकश की है. इसमें इंजन से जुड़ी तकनीक का स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण भी शामिल हो सकता है. इससे भारत को भविष्य में Su-30MKI के AL-31F इंजन को बदलने या सुपर सुखोई प्रोग्राम में नई तकनीक का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.
सोर्स कोड देने की भी पेशकश
रूस ने भारत को विमान के मिशन कंप्यूटर और रडार का सोर्स कोड देने की पेशकश भी की है. इससे भारतीय हथियार प्रणालियों को Su-57 में शामिल करना आसान हो सकता है. इस तरह भारत को हथियारों के एकीकरण के लिए रूसी कंपनियों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सरकारी स्तर पर बातचीत के तहत 40 Su-57E विमानों में दिलचस्पी दिखाई है. इस प्रस्ताव में सिंगल-सीटर विमान शामिल हैं. वहीं, रूस स्थानीय उत्पादन को व्यावहारिक बनाने के लिए 100 अतिरिक्त विमानों का ऑर्डर चाहता है. हालांकि, भारत को 114 राफेल और 140 Su-57 जैसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों के लिए भारी बजट की जरूरत होगी.
Su-57 लड़ाकू विमान की खासियत
Su-57E रूस का पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल स्टील्थ लड़ाकू विमान है. इसे इस तरह बनाया गया है कि दुश्मन के रडार के लिए इसका पता लगाना मुश्किल हो.
इसमें 3D थ्रस्ट वेक्टरिंग नोजल दिए गए हैं, जो विमान को हवा में तेजी से दिशा बदलने में मदद करते हैं. यह बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने में सक्षम है. विमान में N036 AESA रडार लगा है और यह R-37M लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल तथा Kh-69 क्रूज मिसाइल ले जा सकता है. इसकी एक और खासियत रियल-टाइम में डेटा साझा करने की क्षमता है.
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