आरा में किसानों के साथ खेला! सरकारी रिकॉर्ड में हिंद महासागर और श्रीलंका में दिख रही जमीन – Aaj Tak

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बिहार के आरा में भूमि सर्वेक्षण में भारी गड़बड़ी सामने आई है. जहां डिजिटल क्रॉप सर्वे में जिले के 14 प्रखंडों के करीब 45 हजार प्लॉट हिंद महासागर और श्रीलंका में होने की चर्चा है. जिसको लेकर जमीन मालिकों की निंद उड़ गई है. आधिकारिक तौर पर मानें तो यह गड़बड़ी अक्षांश और देशांतर बदलने के कारण हुई है. जिसे जल्द ठीक कर लिया जाएगा. डिजिटल सर्वे में हुई गड़बड़ी की चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है.
माामले में कृषि पदाधिकारी शत्रुघ्न साहू ने बताया कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण ऐसा हो रहा है. डिपार्टमेंट की टीम लगी है. जल्द ही ठीक कर लिया जायेगा. इस चूक का पता तब चला, जब कृषि विभाग के कर्मचारी प्रखंडों में प्लॉट का डिजिटल सर्वे करने में लगाए गए. ऐसा अक्षांश व देशांतर में तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुआ है.
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किसानों की जमीन के बारे में वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध करने और जरूरतमंद किसानों को योजनाओं का उचित लाभ देने के उद्देश्य से डिजिटल क्रॉप सर्वे 20 दिसंबर से चल रहा है. जिला भूमि संरक्षण विभाग प्लॉट के डिजिटल सर्वे को विभागीय साइट पर अपलोड कर रहा है. इस समय अगिआंव, गड़हनी, तरारी आदि प्रखंड के प्लॉटों को उसके सेटेलाइट डाटा के आधार पर अपलोड किया जा रहा है.
विभाग उन प्लॉट को अपलोड नहीं कर पा रहा था, जिनके अक्षांश और देशांतर में तकनीकी गड़बड़ी थी. कागज में जिस स्थान पर जिस मौजा और खसरा का उल्लेख है, वह उस जगह पर नहीं दिखा रहा है. वह सीधे हिंद महासागर में दिख रहा है. कृषि विभाग के अनुसार ऐसी गलती राजस्व विभाग के द्वारा हुई है. राजस्व विभाग ने जमीन को नए सर्वे में अपलोड किया है. उसमें देशांतर की जगह अक्षांश और अक्षांश की जगह देशांतर को अपलोड कर दिया गया है. इस कारण हजारों प्लॉट का भूगोल बदल गया है.
डिजिटल क्रॉप सर्वे से होगा ये फायदा
इस योजना के पूरे होने से किसान और विभाग को लाभ होगा. कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनका भू-अभिलेख आधार से लिंक होगा. किसानों से अपना भू- अभिलेख ठीक कराने को कहा गया है. इसके अलावा किसानों को फसल विशेष से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय से मिलना सुनिश्चित करने में डिजिटल क्रॉप सर्वे मदद करेगा.
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कृषि विभाग को 31 जनवरी तक 10 लाख प्लॉट के डिजिटल सर्वे का लक्ष्य दिया गया है. एक प्लॉट का सर्वे करने के लिए पांच रुपये का बोनस दिया जा रहा है. 24 जनवरी तक 95 हजार प्लॉट का डिजिटल सर्वे हुआ है. इनमें 45 हजार प्लॉट के अक्षांश और देशांतर में गड़बड़ी मिली है. ये वो प्लॉट हैं, जिन्हें राजस्व विभाग ने सर्वे के बाद ऑनलाइन किया है. कृषि विभाग किस प्लॉट में रबी अथवा खरीफ की फसल हो रही है. इसका अक्षांश और देशांतर के अनुसार सर्वे करा रहा है.
वहीं इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी शत्रुधन साहू ने बताया कि सभी प्रखंडों में डिजिटल सर्वे किया जा रहा है. इनमें प्रखंड अंतर्गत कृषि सलाहकार, कृषि समन्वयक आदि कर्मियों को लगाया गया है. उन्होंने बताया कि उन्हीं प्लॉटों का सर्वे किया जा रहा है, जिनका परिमार्जन ऑनलाइन हो सका है. जो गड़बड़ी सामने आई है वह सॉफ्टवेयर की वजह से हुआ है इसमें कोई तकनीकी समस्या नहीं है. डिपार्टमेंट की टीम उसे पर काम कर रही है और जैसे ही यह गड़बड़ी ठीक कर दी जाएगी, उसके बाद सर्वे को आगे जारी रखा जाएगा. 
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