भारत के लिए बजी खतरे की घंटी! तेजी से बढ़ रहा है उमस भरी गर्मी का खतरा, जानिए वजह – India.Com

Published By: Rishabh Kumar | Updated: Jun 25, 2026, 12:04 AM
भारत में तेज गर्मी के साथ अब उमस भी बड़ी परेशानी बनती जा रही है. एक नए रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक में जहां हर साल करीब 101 दिन खतरनाक उमस वाली गर्मी महसूस होती थी, वहीं 2016 से 2025 के बीच 'क्लाइमेट सेंट्रल' की एक स्टडी के अनुसार यह संख्या बढ़कर लगभग 141 दिन हो गई. इसका मतलब है कि लोगों को साल में ज्यादा समय तक ऐसी गर्मी झेलनी पड़ रही है, जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. Image: AI
उमस वाली गर्मी को सिर्फ तापमान देखकर नहीं समझा जा सकता. इसके लिए वेट-बल्ब तापमान का इस्तेमाल किया जाता है, जो गर्मी और हवा में मौजूद नमी दोनों को मिलाकर बताता है कि इंसान को मौसम असल में कितना मुश्किल लग रहा है. जब यह तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाता है, तो वह दिन खतरनाक उमस वाला माना जाता है. ऐसे मौसम में शरीर के लिए खुद को ठंडा रखना मुश्किल हो सकता है.
उमस भरी गर्मी में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है, लेकिन ज्यादा नमी होने पर पसीना आसानी से नहीं सूख पाता. इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक ऐसी गर्मी में रहने से थकान, कमजोरी और गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं. खासकर बाहर काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा चिंता की बात है.
विश्लेषण में बताया गया है कि खतरनाक उमस वाले दिनों के बढ़ने में जलवायु बदलाव की बड़ी भूमिका है. वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले जो मौसम बहुत कम देखने को मिलता था, वह अब कई जगहों पर आम होता जा रहा है. बढ़ता तापमान और बदलता मौसम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रहा है. इससे आने वाले समय में गर्मी और उमस से जुड़ी परेशानियां और बढ़ सकती हैं.
भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्से खतरनाक उमस भरी गर्मी का सामना कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक में दुनिया में ऐसे दिन औसतन 10 दिन होते थे, जो 2016-25 के बीच बढ़कर 23 दिन हो गए. सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में देखा गया है जहां पहले से ही गर्म और नमी वाला मौसम रहता है. यहां लोगों की सेहत और जीवन पर बड़ा असर पड़ रहा है.
उष्णकटिबंधीय यानी ज्यादा गर्म और नमी वाले क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. इन जगहों पर वेट-बल्ब तापमान पहले से ज्यादा रहता है और खतरनाक स्तर के करीब पहुंच जाता है. ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गर्मी से बचने के लिए ज्यादा सावधानी रखनी पड़ सकती है. दिन के समय बाहर निकलना, पानी की कमी और ज्यादा मेहनत करना मुश्किल हो सकता है.
जलवायु बदलाव अब सिर्फ मौसम की बात नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है. खतरनाक उमस वाले दिनों की बढ़ती संख्या बताती है कि आने वाले समय में गर्मी से निपटने की तैयारी जरूरी होगी. घरों, काम की जगहों और शहरों में लोगों को ऐसे मौसम के लिए बेहतर इंतजाम करने होंगे ताकि स्वास्थ्य पर कम असर पड़े. (इनपुट: भाषा) (All Image: Canva
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