परिसीमन बिल पर हो गया दो तिहाई बहुमत का जुगाड़? DMK सांसदों की आज बैठक, विशेष सत्र की भी चर्चा – Hindustan

संसद का मॉनसून सत्र भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन इसका अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि सरकार ने अभी भी विशेष सत्र की गुंजाइश को जिंदा रखा है। हाल के महीनों में कई ऐसी खबरें सामने आईं कि सरकार परिसीमन विधेयक को लेकर एक विशेष सत्र बुला सकती है। हालांकि, इसके लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यक्ता है, जो कि फिलहाल सत्तारूढ़ एनडीए के पास नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसके जुगाड़ में जुटी हुई है। इसके लिए एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके से भी बात चल रही है। आज स्टालिन ने डीएमके संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक चेन्नई में बुलाई है।

डीएमके की यह बैठक एमके स्टालिन की अध्यक्षता में होगी। इसमें लोकसभा के 22 और राज्यसभा के 8 सांसद लेंगे हिस्सा। एजेंडे के मुताबिक, इस बैठक में राज्य और राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बात की संभावना है कि स्टालिन इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर भी चर्चा करेंगे।

एनडीए का आत्मविश्वास बीते दिनों बढ़ा है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो चुके हैं। डीएमके के पास लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। इसने कांग्रेस और INDIA गठबंधन से दूरी बना ली है।

लोकसभा में 540 सांसद हैं। दो तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए सरकार को 360 वोटों की जरूरत है। फिलहाल NDA के पास 292 सांसद हैं। यानी उसे 68 और वोटों की जरूरत है। तृणमूल के 20 बागी सांसदों के साथ यह संख्या 312 हो जाती है। शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसद इस संख्या को बढ़ाकर 318 कर देते हैं। डीएमके अगर समर्थन का ऐलान करती है तो एनडीए की संख्या लोकसभा में 340 हो जाएगी।

भाजपा को शरद पवार गुट के NCP से भी उम्मीद है। लोकसभा में उनके 8 सांसद। अगर यह संभावना हकीकत में बदलती है तो एनडीए सांसदों की कुल संख्या 348 हो जाएगी। 360 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए सरकार को इसके बाद भी 12 और सांसदों की जरूरत होगी। ऐसे में छोटे दलों के सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

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चूंकि संसद के शीतकालीन सत्र की संभावित तिथि नवंबर के आखिरी सप्ताह में होती है, ऐसे में विशेष बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो गया था। आम तौर पर इसके सप्ताह भर में सत्रावसान हो जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा न कर इसे जारी रखा है। ऐसी स्थिति में सरकार कभी भी संसद की विशेष बैठक बुला सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी के लिए ही इसे जारी रखा हुआ है। इसके लिए वह जरूरी दो तिहाई का आंकड़ा सुनिश्चित कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि परोक्ष रूप से विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूर हुई द्रमुक के साथ उसका संपर्क बना हुआ है, पर समर्थन को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। सूत्रों का कहना है अगर सरकार ने जरूरी संख्या जुटा ली तो अक्तूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर के शुरूआती दिनों में विशेष बैठक बुलाई जा सकती है। मौजूदा सत्र के सत्रावसान के बाद ही अगले यानी शीत सत्र को बुलाया जा सकता है ।

कांग्रेस ने केंद्र को पत्र लिखकर बिना व्यापक परामर्श के एक और संवैधानिक विधेयक को पारित कराने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी है। साथ ही पार्टी ने मॉनसून सत्र के सत्रावसान में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने केंद्र से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बारे में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार को 17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन बिल की हार की भी याद दिलाई है। खरगे ने कहा है कि व्यापक परामर्श के बगैर एक और संवैधानिक संशोधन बिल पारित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को लिखे पत्र का भी जिक्र किया।

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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