Shreeom Singh
Date: 22-10-26 19:48
बिना किसी उचित कारण के लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता माना जा सकता है. राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में यह अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने पति को दिए गए तलाक के फैसले को सही ठहराते हुए पत्नी की दोनों अपीलें खारिज कर दीं.
यह मामला साल 2018 में हुई एक शादी से जुड़ा है. पति बालोतरा में कुल्फी बनाने का काम करता है, जबकि पत्नी जैसलमेर नगर परिषद में जूनियर अकाउंटेंट थी. पति ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी ने उससे शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया. उसने यह भी कहा कि पत्नी उसके काम को लेकर ताने मारती थी और जहर खाकर जान देने की धमकी देती थी.
शादी के कुछ दिन बाद ही अलग रहने लगे
पति के मुताबिक, शादी के बाद पत्नी करीब 10 दिन तक बालोतरा में उसके साथ रही. इसके बाद वह अपनी नौकरी के कारण जैसलमेर लौट गई. कुछ समय बाद पति भी करीब 15 से 20 दिन तक जैसलमेर में पत्नी के साथ रहा. इसी दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे.
पति का कहना था कि 25 अक्टूबर 2018 के बाद उनके बीच शारीरिक संबंध नहीं बने और वे अलग रहने लगे. इसके बाद उसने मानसिक क्रूरता और अलग रहने को आधार बनाकर तलाक की मांग की.
पत्नी ने पति पर लगाए ये आरोप
पत्नी ने पति के आरोपों को गलत बताया. उसका कहना था कि पति छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था और उस पर नौकरी छोड़कर बालोतरा आने का दबाव बनाता था. पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसकी सैलरी का आधा हिस्सा मांगता था.
पत्नी के मुताबिक, वह पति के साथ रहना चाहती थी, लेकिन नौकरी छोड़ने को तैयार नहीं थी. उसने अदालत से वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू कराने की मांग भी की थी.
फैमिली कोर्ट ने 2024 में दिया था तलाक
जैसलमेर की फैमिली कोर्ट ने 20 फरवरी 2024 को पति की याचिका स्वीकार करते हुए मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक दे दिया था. कोर्ट ने पत्नी की वैवाहिक जीवन बहाल कराने की याचिका भी खारिज कर दी थी.
इसके बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी. उसने तलाक के आदेश और वैवाहिक जीवन बहाल कराने की मांग खारिज किए जाने, दोनों के खिलाफ अपील की थी.
हाईकोर्ट ने क्यों बरकरार रखा तलाक का फैसला?
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ में जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे. पीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत मानसिक क्रूरता के मामले पर विचार किया. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के समर घोष बनाम जया घोष और सोनल तलपदा बनाम वीरभान सिंह (2026) मामलों का भी हवाला दिया गया.
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति या पत्नी बिना किसी उचित कारण के लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करता है, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है. कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी ने अपने जवाब में 25 अक्टूबर 2018 के बाद शारीरिक संबंध दोबारा शुरू होने की बात नहीं कही थी. रिकॉर्ड में शारीरिक अक्षमता का कोई सबूत भी नहीं मिला.
कोर्ट ने आत्महत्या की धमकी से जुड़े आरोपों और मामले में पेश किए गए सबूतों पर भी विचार किया. सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा और पत्नी की दोनों अपीलें खारिज कर दीं.
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