यूपीआई के लिए कोई शुल्क चुकाने से परहेज क्यों – Hindustan

व्यापारियों को किए जाने वाले बड़े यूपीआई भुगतान (उन व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक का, जो यूपीआई के जरिये महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम प्राप्त करते हैं) पर हाल में घोषित ‘व्यापारी छूट दर (एमडीआर)’ को लागू करने का फैसला दीपावली तक के लिए टाल दिया गया है।

यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को एक ऐसी सुविधा में बदल दिया है, जिसमें कोई रुकावट नहीं आती और अब तक यह पूरी तरह से नि:शुल्क रही है। हालांकि, इस विकास को सरकार के उस आदेश से बल मिला, जिसमें बैंकों के बीच धन के लेन-देन पर एमडीआर को शून्य रखा गया था। यह मुफ्त मॉडल ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो गया और लोगों ने बड़ी तेजी से यूपीआई को अपनाना शुरू कर दिया, लेकिन साथ ही यह बहस भी छिड़ी कि इसको चलाने का खर्च कौन उठाएगा? आज यूपीआई प्लेटफॉर्म को चलाने का सालाना खर्च लगभग 20,000 करोड़ रुपये (2 अरब डॉलर से कुछ अधिक) होने का अनुमान है। हम आज जिस स्थिति में हैं, वह एक बेहतरीन नीतिगत कदम और बाद की गलतियों का नतीजा है।

ये सफलताएं और विफलताएं, भारतीय कानूनों से जुड़ी बड़ी समस्या की ओर इशारा करती हैं, इसलिए इनको विस्तार से समझना जरूरी है। ‘नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई)’ ने 2016 में यूपीआई की शुरुआत की थी। असल में, नंदन नीलेकणि समिति ने एक ऐसी भुगतान प्रणाली का सुझाव दिया था, जो सरल हो, किसी वॉलेट के बिना हो और बहुत कम डाटा खाने वाला हो। इसकी सबसे अहम खूबी पूरे इकोसिस्टम में आपसी तालमेल थी। यूपीआई को इस तरह डिजाइन किया गया था कि इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके, बड़े स्तर तक फैलाया जा सके और यह मुश्किल समय में भी टिका रहे। इसने उम्मीद से कहीं बेहतर काम करके दिखाया।

यूपीआई पर तीन साल से कुछ अधिक समय तक 0.3 प्रतिशत तक का एमडीआर लागू था। नीतिगत गलती तब हुई, जब 2019 में ‘पेमेंट ऐंड सेटलमेंट सिस्टम ऐक्ट, 2007’ की धारा 10ए में संशोधन करके एमडीआर को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। इससे इस इकोसिस्टम से जुड़े सभी पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा, सिवाय एनपीसीआई के, जिसने लेन-देन की भारी संख्या के जरिये कमाई की। दूसरी बार नोटबंदी के बाद की आर्थिक अनिश्चितता और कोविड के दौरान कई ऐसी गलतियां हुईं, जिनकी वजह से यूपीआई इकोसिस्टम में निजी क्षेत्र की भूमिका को कम कर इसे सरकार के ‘मिशन-मोड प्रोजेक्ट’ के रूप में पेश किया गया। इसके बाद सरकार ने खुद का ‘भीम’ ऐप बनाया और सरकारी हस्तियों को टीवी पर इसका प्रचार करने के लिए उतार दिया।

यूपीआई का मूल दर्शन यह रहा है कि इसमें होने वाले नवाचार, चाहे वे तकनीकी अपग्रेड हों या ग्राहकों के लिए नए फीचर् होंं, एनपीसीआई के माध्यम से ही आने चाहिए। इस तंत्र को व्यापक रूप से सुलभ और आसान बनाने के पहले चरण में इसने बेहतरीन काम किया था, लेकिन अब यह प्रत्याशित रूप से पीछे छूटने लगा है। इस समय भारत एक और नीतिगत गलती कर रहा है। वह यह कि एमडीआर लागू करते समय त्योहारों का ध्यान रखा जाना चाहिए था। सभी यूपीआई अंतरण पर एक ‘प्रोग्रेसिव टोल (स्लैब के हिसाब से शुल्क)’ लगाया जाना चाहिए। अगर अधिकतम सीमा 0.4 प्रतिशत और 300 रुपये तय की जाती है, तो छोटे भुगतान पर 0.1 प्रतिशत जैसा शुल्क लगाया जा सकता है। बेहतर होगा कि कुल शुल्क की एक अधिकतम सीमा तय कर दी जाए और फिर पूरे इकोसिस्टम को बिना किसी दखल के अपनी मर्जी से शुल्क तय करने की छूट दे दी जाए।

देश में एक आम नागरिक बस के सफर के लिए 10 रुपये खर्च करता है और अपने घर से कचरा उठवाने के लिए भी लगभग इतनी ही रकम चुकाता है। लोग सड़क टोल, एयरपोर्ट चार्ज, बिजली और पानी के बिल के रूप में सैकड़ों रुपये देते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि यूपीआई सिस्टम भी इससे अलग नहीं है, लेकिन जब आप शुल्क लगाने में देरी करते हैं और खुद ही इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि यह किस पर लागू होना चाहिए, तो हर कोई इसे मुफ्त में ही पाने की उम्मीद करने लगता है।

हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। करीब एक सदी से यह अखबार हिंदी भाषी पाठकों की पसंद बना हुआ है। देश-दुनिया की Hindi News को पढ़ने के लिए यह अखबार लगातार पाठकों की पसंद बना हुआ है। इसके अतिरिक्त समकालीन मुद्दों पर त्वरित टिप्पणी, विद्वानों के विचार और साहित्यिक सामग्री को भी लोग पसंद करते रहे हैं। यहां आप ग्लोबल से लोकल तक के सभी समाचार एक ही स्थान पर पा सकते हैं। हिन्दुस्तान अखबार आपको उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की खबरें प्रदान करता है। दक्षिण भारत के राज्यों की खबरें भी आप यहां पाते हैं।

इसके अतिरिक्त मनोरंजन, बिजनेस, राशिफल, करियर, ऑटो, गैजेट्स और प्रशासन से जुड़ी खबरें भी यहां आप पढ़ सकते हैं। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है।
लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News