ठंड में अलाव तापना पड़ेगा महंगा! दिल्ली में 1 नवंबर से लागू होंगे सख्त नियम, कितना लगेगा जुर्माना? – Bharat24live

Shreeom Singh
Date: 26-10-26 15:20
दिल्ली में सर्दियों के साथ ही प्रदूषण की समस्या भी बढ़ने लगती है. इसे रोकने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक राजधानी में पर्यावरण से जुड़े नियम सख्त रहेंगे. दशहरे के बाद एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने के चलते ग्रैप (GRAP) का पहला चरण भी लागू हो चुका है. ऐसे में लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि सर्दियों में किन कामों पर रोक रहेगी और नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना देना पड़ सकता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने पर भी जुर्माना लगेगा?
अलाव जलाने पर भी हो सकती है कार्रवाई
दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान और ग्रैप के नियमों के तहत खुले में अलाव जलाने, सूखे पत्ते जलाने और कूड़ा-कचरा जलाने पर रोक है. इन चीजों को जलाने से हवा में प्रदूषण बढ़ता है. इसी वजह से प्रशासन ने लैंडफिल और कूड़ा डालने वाली जगहों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि वहां आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके.
ठंड से बचने के लिए क्या करना होगा?
दिल्ली के विंटर एक्शन प्लान में ‘जीरो बर्निंग’ अभियान भी शामिल है. इसके तहत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), सोसायटियों, बाजार संघों और ठेकेदारों को अपने इलाकों में खुले में कुछ भी जलाने से रोकने की जिम्मेदारी दी गई है.
सर्दियों में कई लोग ठंड से बचने के लिए लकड़ी, सूखे पत्ते या कूड़ा जलाकर अलाव तापते हैं. लेकिन इससे प्रदूषण बढ़ता है. इसलिए सरकार ने सुरक्षा गार्ड और रात में बाहर काम करने वाले लोगों के लिए हीटिंग स्पॉट या गर्माहट देने वाले बूथ लगाने की व्यवस्था करने को कहा है. इसका मकसद लोगों को ठंड से बचाना और खुले में आग जलाने की घटनाओं को रोकना है.
किन चीजों को जलाने पर लग सकता है जुर्माना?
दिल्ली में खुले में अलाव जलाने के अलावा सूखे पत्ते, कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक, रबर और दूसरे तरह के जैविक कचरे को जलाने पर भी कार्रवाई हो सकती है. ये पाबंदियां ग्रैप और विंटर एक्शन प्लान के तहत लागू हैं.
नियमों का उल्लंघन करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों और पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
कितना देना पड़ सकता है जुर्माना?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के 2014-2015 के आदेशों के अनुसार, खुले में कूड़ा, सूखे पत्ते, प्लास्टिक या दूसरे कचरे को जलाने पर 5,000 रुपये तक का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है. वहीं, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के कुछ मामलों में यह जुर्माना 7,500 रुपये तक हो सकता है.
अगर कोई सोसायटी, RWA, ठेकेदार या नियोक्ता अपने कर्मचारियों, जैसे सुरक्षा गार्डों को खुले में अलाव जलाने की अनुमति देता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है. ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई भी संभव है.
कौन लगा सकता है जुर्माना?
खुले में कूड़ा या अलाव जलाने के मामलों में संबंधित अधिकारी जुर्माना लगा सकते हैं. इनमें जिला प्रशासन के डिप्टी तहसीलदार या उनसे ऊपर के अधिकारी और MCD तथा NDMC के सैनिटरी इंस्पेक्टर शामिल हैं.
जुर्माने से मिलने वाली राशि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के खाते में जमा की जाती है. ऐसे में सर्दियों के दौरान ठंड से बचने के लिए खुले में लकड़ी, पत्ते या कूड़ा जलाने से बचना जरूरी है. इससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और जुर्माने से भी बचा जा सकेगा.
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