Gonda News: गोण्डा, संवाददाता। अयोध्या में सरयू तट पर दीपोत्सव के स्वर्णिम आभा देश-विदेश में बैठे प्रभु राम के श्रद्धालुओं के हृदय में बसी रहती है। रामपैड़ी जगमगाने वाले लाखों दीयों में गोण्डा जिले के कुम्हारों की मेहनत और हुनर की चमक भी शामिल है। रामनगरी के दीपोत्सव ने जिले के मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों के लिए रोजगार और आमदनी का अवसर दिया है। इस बार जिले में तैयार आठ लाख दीये प्रभु श्रीराम की नगरी को अपने प्रकाश से आलोकित करेंगे। जिले के दर्जन भर परिवार को आठ लाख दीये भेजने के एवज में औसतन आठ से दस लाख रुपये तक की आमदनी होगी। वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र के डुमरियाडीह गांव के जगदम्बा शरण प्रजापति अयोध्या में दीपोत्सव के लिए एक लाख दीये भेज चुके हैं। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से अब तक वह दस लाख दीये अयोध्या भेज चुके हैं। वहीं, रौजा गांव के सद्दाम समेत अन्य कारीगर सात लाख दीये भेजने की तैयारी में जुटे हैं। दोनों गांवों से कुल आठ लाख दीये भेजने की योजना है। बताया जा रहा है कि कुम्हारों को एक हजार दीये पर तकरीबन छह सौ रुपये मिलते हैं।
मेहनत और हुनर से संवर रही आजीविका: मिट्टी तैयार करने से लेकर दीयों को आकार देने, सुखाने और पकाने तक कुम्हार परिवारों को कई दिनों तक मेहनत करनी पड़ती है। दीपावली के दौरान मांग बढ़ने से उनके हुनर को बाजार मिलता है। इस कारोबार से जुड़े करीब दर्जन भर परिवारों को हर साल रोजगार मिलता है। डुमरियाडीह के ईश्वर शरण, सियाराम, भोलानाथ, महंत प्रसाद और प्रमोद कुमार जैसे कारीगरों के लिए यह काम परंपरा के साथ आजीविका का भी साधन है। अयोध्या में बीते 2017 से शुरू हुआ दीपोत्सव इन परिवारों की खुशी में हर साल चमक बिखेर रहा है। परंपरागत तरीके से हाथ के चाक पर दीये बनाने वाले कई परिवार अब इलेक्ट्रिक चॉक का प्रयोग कर रहे हैं। इससे कुम्हारी कला का संरक्षण होने के साथ नई पीढ़ी को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। दीपोत्सव में दीये का ऑर्डर मिलने के बाद ये परिवार दिन-रात काम में जुटे हैं। सियाराम कहते हैं कि प्रभु राम की नगरी के लिए जलने वाले दीये बनाने में असीम संतोष का भी अनुभव होता है। हम लोगों को गर्व है कि देश-दुनिया में दीपोत्सव में हमारी भी थोड़ी बहुत भागीदारी हो जाती है।
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अयोध्या का दीपोत्सव जिले के कुम्हारों को पारंपरिक कला के माध्यम से रोजगार पाने का अवसर देता है। मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से परिवारों की आमदनी बढ़ी है। शासन की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ भी कारीगरों को दिया गया है। इससे कुम्हारी कला और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। इस बार जिले के आठ दीये भेजे जाएंगे।
-महेंद्र कुमार मिश्रा, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
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