मुख्य बातें
EPS-95 Higher Pension: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत ज्यादा पेंशन का इंतजार कर रहे रिटायर्ड कर्मचारियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पेंशनर्स के संगठन ने अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के एक सर्कुलर के कारण कई रिटायर्ड कर्मचारियों के हायर पेंशन के आवेदन अटक रहे हैं या खारिज किए जा रहे हैं। संगठन ने इस सर्कुलर को वापस लेने, पेंशन से जुड़े मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी रोकने और प्रशासनिक देरी के कारण लगे ब्याज को माफ करने की मांग की है।
नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ पेंशनर्स एसोसिएशंस (NCPA) ने 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर EPS-95 के तहत हायर पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की है। संगठन का दावा है कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और निजी क्षेत्र के करीब 10 लाख पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करता है।
NCPA ने राष्ट्रपति से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO को जरूरी निर्देश देने की अपील की है। संगठन चाहता है कि हायर पेंशन के लंबित मामलों में अनावश्यक कानूनी लड़ाई बंद हो और पात्र रिटायर्ड कर्मचारियों के दावों का जल्द निपटारा किया जाए। पेंशनर्स संगठन का कहना है कि कई वरिष्ठ नागरिकों को पहले से ही कम पेंशन मिल रही है। ऐसे में पेंशन के अधिकार के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ना उनके लिए आर्थिक और मानसिक रूप से मुश्किल हो रहा है।
NCPA की सबसे बड़ी आपत्ति EPFO के 18 जनवरी 2025 को जारी सर्कुलर को लेकर है। संगठन के मुताबिक, इस सर्कुलर में कहा गया है कि छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों (Exempted Establishments) में ज्यादा वेतन के आधार पर पेंशन की पात्रता तय करते समय संबंधित PF ट्रस्ट के लागू नियमों को भी देखा जाना चाहिए।
एक्जेमप्टेड इस्टिबलिशमेंट (Exempted Establishments) वे संस्थान होते हैं, जिन्हें निर्धारित शर्तों के तहत EPFO की सामान्य व्यवस्था से अलग अपना PF ट्रस्ट चलाने की अनुमति मिली होती है। NCPA का आरोप है कि कुछ मामलों में पुराने ट्रस्ट नियमों में वेतन की सीमा तय होने के आधार पर कर्मचारियों के हायर पेंशन के आवेदन रोके जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि इससे एक ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में काम करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ भी अलग-अलग व्यवहार हो सकता है।
संगठन ने राष्ट्रपति से इस सर्कुलर को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की है। हालांकि, यह NCPA की मांग है; सर्कुलर को वापस लेने या सभी लंबित आवेदनों को मंजूरी देने का कोई नया सरकारी आदेश इस पत्र से अपने आप लागू नहीं होता।
NCPA ने अपने पत्र में हायर EPS पेंशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसलों का हवाला दिया है। इनमें 2016 का आरसी गुप्ता मामला और 2022 का *EPFO बनाम सुनील कुमार बी.* मामला शामिल है। संगठन का कहना है कि 2022 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन के उद्देश्य से छूट प्राप्त और गैर-छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को एक ही वर्ग के रूप में देखा था। NCPA का आरोप है कि EPFO की मौजूदा प्रक्रिया इन फैसलों की भावना के अनुरूप नहीं है।
संगठन ने मद्रास हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया है। उसके मुताबिक, इस फैसले में PF ट्रस्ट के आंतरिक नियमों और कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया है। NCPA का कहना है कि आंतरिक ट्रस्ट नियमों के आधार पर कर्मचारियों के वैधानिक पेंशन अधिकार सीमित नहीं किए जाने चाहिए। इन कानूनी दलीलों पर अंतिम स्थिति संबंधित फैसलों, उनके दायरे और हर मामले के तथ्यों के आधार पर तय होगी।
NCPA का कहना है कि कुछ प्रतिष्ठानों के रिटायर्ड कर्मचारियों को हायर EPS पेंशन का लाभ मिल रहा है, जबकि उन्हीं संस्थानों के दूसरे केंद्रों या यूनिट में काम कर चुके कर्मचारियों के आवेदन कथित तौर पर खारिज किए जा रहे हैं। संगठन ने SAIL, HAL, BHEL, IOCL, HMT, BEL और ITI जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा है कि एक ही कंपनी के कर्मचारियों के बीच इस तरह का अंतर चिंता का विषय है।
NCPA के मुताबिक, इससे कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा होती है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में भी उठाया है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में पात्रता और आवेदन की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए हर पेंशनर के मामले का फैसला संबंधित रिकॉर्ड, नियमों और लागू अदालती आदेशों के आधार पर ही होगा।
NCPA ने पत्र में दावा किया है कि कई पेंशनर्स को हर महीने केवल ₹2,000 से ₹5,000 तक पेंशन मिल रही है। ऐसे में हायर पेंशन के लिए अदालतों के चक्कर लगाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। संगठन ने EPFO के पेंशन फंड में ₹11 लाख करोड़ से अधिक की राशि होने का उल्लेख करते हुए कहा है कि लंबित मामलों का समाधान करने में और देरी नहीं होनी चाहिए।
NCPA के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले के बाद विभिन्न हाई कोर्ट में 400 से ज्यादा रिट याचिकाएं और अपीलें लंबित हैं। संगठन ने यह भी दावा किया है कि 10 हाई कोर्ट 200 से अधिक याचिकाओं से जुड़े मामलों में पेंशनर्स के पक्ष में 26 फैसले दे चुके हैं। ये आंकड़े संगठन के पत्र में किए गए दावों पर आधारित हैं। इनसे सभी पेंशनर्स के मामलों में एक जैसा फैसला होने की गारंटी नहीं मिलती।
NCPA ने अपने पत्र में 10 अगस्त 2026 को संसद में श्रम मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी का भी हवाला दिया है। संगठन के मुताबिक, मंत्रालय ने बताया था कि हायर वेजेज पर पेंशन (PoHW) से जुड़े 1,49,806 से अधिक आदेश जारी किए जा चुके थे। NCPA का कहना है कि जब कई कर्मचारियों को हायर पेंशन का लाभ मिल चुका है, तो दूसरे पात्र कर्मचारियों के मामलों में भी समान और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
NCPA ने इस सर्कुलर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इसके कारण पात्र कर्मचारियों के हायर पेंशन आवेदन प्रभावित हो रहे हैं।
संगठन चाहता है कि लंबित मुकदमों की समीक्षा की जाए और उन अपीलों को वापस लेने पर विचार हो, जो पहले से तय कानूनी मुद्दों पर अनावश्यक रूप से जारी हैं। साथ ही, छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के पेंशनर्स के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
NCPA ने मांग की है कि EPFO की प्रशासनिक देरी के कारण हायर पेंशन के मामलों में लगे दंडात्मक ब्याज को माफ करने पर विचार किया जाए। इसके अलावा, पात्र कर्मचारियों के जॉइंट ऑप्शन स्वीकार करने और लंबित दावों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय की जाए।
फिलहाल राष्ट्रपति को पत्र लिखना पेंशनर्स संगठन की ओर से की गई मांग है। इससे अपने आप EPFO के नियम नहीं बदलते और न ही सभी लंबित हायर पेंशन आवेदन मंजूर हो जाते हैं। अब इस मामले में संबंधित मंत्रालय और EPFO की ओर से किसी आधिकारिक कदम या आदेश पर नजर रहेगी।
हायर EPS पेंशन के लिए आवेदन करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को अपने आवेदन की स्थिति, EPFO की ओर से मांगे गए दस्तावेजों और अपने मामले पर लागू अदालती आदेशों की जानकारी लेते रहना चाहिए। किसी भी नए सरकारी आदेश या आधिकारिक निर्देश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन पेंशनर्स को क्या राहत मिल सकती है।
सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।
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