Shreeom Singh
Date: 29-10-26 16:26
इजरायल में चुनाव के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है. वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके विरोधी गादी आइजनकोट, दोनों के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है. आइजनकोट के पास अरब पार्टियों का समर्थन लेने का विकल्प है, लेकिन इसकी संभावना कम नजर आ रही है. ऐसे में अब सबकी नजरें अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टिकी हैं.
दो दिन पहले वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि व्हाइट हाउस नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि इजरायल में दक्षिणपंथी पार्टियों की सरकार बने. अगर अरब पार्टियां सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, तो इससे अमेरिका का राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकता है.
दोनों नेताओं ने क्या संकेत दिए?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि देश में मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाना जरूरी है, ताकि ईरान से पैदा होने वाले खतरे का मुकाबला किया जा सके.
वहीं, पूर्व आईडीएफ प्रमुख गादी आइजनकोट ने अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि देश की सेवा के लिए एक यहूदी सरकार बनाई जाएगी.
क्या नेतन्याहू और आइजनकोट साथ आएंगे?
इजरायल में दोनों नेताओं के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा तेज है. इसकी एक बड़ी वजह दोनों की विचारधारा में समानता है. दूसरी वजह अमेरिका का दबाव माना जा रहा है. माना जा रहा है कि मौजूदा हालात में इजरायल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
चुनाव के आखिरी दौर में ट्रंप ने इजरायल की राजनीति में खुलकर दिलचस्पी दिखाई थी. उन्होंने दावा किया था कि उनके समर्थन से नेतन्याहू को चुनाव में फायदा हुआ. मौजूदा मिडिल ईस्ट हालात को देखते हुए भी इजरायल के लिए अमेरिका, खासकर ट्रंप का विरोध करना मुश्किल हो सकता है.
दोबारा चुनाव हुए तो आइजनकोट को होगा नुकसान?
अगर इजरायल में सरकार नहीं बन पाती है, तो देश में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है. ऐसा होना गादी आइजनकोट के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, जबकि नेतन्याहू को अपनी स्थिति मजबूत करने का एक और मौका मिल सकता है.
इस बीच, अरब पार्टियों की बढ़ती ताकत ने इजरायल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. पहली बार अरब पार्टियां इतनी मजबूत स्थिति में नजर आ रही हैं. नेतन्याहू ने भी इन पार्टियों पर चुनाव चुराने का आरोप लगाया है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा इजरायल की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है.
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