आखिर आ ही गया वाराणसी का नतीजा, MLC चुनाव में सपा के आशुतोष सिन्हा जीते – AajTak

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उत्तर प्रदेश की हाईप्रोफाइल वाराणसी खंड स्नातक MLC सीट का नतीजा आखिरकार घोषित हो गया है. लंबे समय से चल रही मतगणना के बाद आए नतीजों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने शानदार जीत दर्ज की है. उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी और बीजेपी के प्रत्याशी केदार नाथ सिंह को शिकस्त दे दी है.
वाराणसी स्नातक सीट के लिए 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था, जिसके बाद 27 अक्टूबर से वोटों की गिनती शुरू हुई थी. मतगणना लंबी चलने के कारण सभी की नजरें इस सीट के नतीजों पर टिकी हुई थीं.
आखिरकार समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की. उन्होंने कुल 55,046 मतों से जीत दर्ज की है. पिछली बार के मुकाबले इस बार आशुतोष सिन्हा ने पांच गुना ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी पकड़ को और मजबूत साबित किया है.
अखिलेश यादव और कार्यकर्ताओं को दिया जीत का श्रेय
विजयी घोषित होने के बाद सपा नेता आशुतोष सिन्हा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘ये मेरी जीत नहीं है, ये समाजवादी पार्टी के हर एक नेता और कार्यकर्ता की जीत है, जिन्होंने पूरे मन से हमारा साथ दिया और आशीर्वाद दिया.’
उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय पार्टी नेतृत्व को देते हुए कहा, ‘जीत का श्रेय समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, हमारे सहयोगियों और हर कदम पर हमारा साथ देने वालों को जाता है.’
जीत दर्ज करने के बाद आशुतोष सिन्हा ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘अभी तो ये झांकी है, पूरा उत्तर प्रदेश जीतना बाकी है. हम प्रदेश में सरकार बनाने जा रहे हैं.’
इसके अलावा, उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण की तारीफ करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं ने दिन-रात जागकर मतगणना स्थल पर कड़ी नजर बनाए रखी, जिसके कारण निष्पक्ष और सही मतगणना मुमकिन हो सकी.
अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना 
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्नातक-शिक्षक एमएलसी चुनावों में अपने 5 प्रत्याशियों की जीत पर उन्हें बधाई दी है. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, ‘प्रिय मतदाताओं, भाजपा एक फ्लॉप शो बन गई है. भाजपा वाले वाराणसी में पहले काउंटिंग में हारे, फिर दोबारा री-काउंटिंग में हारे, मतलब दो बार मतगणना हुई और दोनों बार भाजपा और उनके संगी-साथी हारे. ये डबल इंजन की डबल हार है.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘विधान परिषद के चुनावों में भाजपा की हार ने 2027 में होने वाले उ.प्र. विधानसभा चुनाव की प्रस्तावना लिख दी है. ये एक तरफ भाजपा की शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा विरोधी नीतियों की हार है, तो दूसरी तरफ पढ़े-लिखे बेरोजगार स्नातकों ने भी अपना फैसला सुना दिया है. भाजपा ने हर समाज को जिस तरह पीड़ित, दुखी, अपमानित किया है, उससे सभी उत्पीड़ित एक साथ आ गए हैं. पीडीए का जनाधार अब 95% हो गया है, क्योंकि जो पीड़ित, वो पीडीए- इससे भाजपा में अस्तित्व का संकट शुरू हो गया है, क्योंकि भाजपा के अंदर तो सभी लोग जानते हैं कि जो सीटें भाजपा जीती भी है, वो भी हेराफेरी से जीती गई हैं.’
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