Bhagalpur News: अररिया: शहर होकर बहने वाली एबीसी नहर में पानी नहीं, गंदगी का भी अंबार – Hindustan

Bhagalpur News: अररिया से फुलेन्द्र मल्लिक अररिया शहर होकर बहने वाली एबीसी नहर में जहां इस बार पानी नहीं है वहीं जहां-तहां गंदगियों का अंबार भरा पड़ा है। नहर पूरी तरह दलदल में तब्दील है। ऐसे में छठ व्रती कैसे लोकआस्था का पर्व मनाएंगे, इसकी चिंता उन्हें साल रही है। उन्हें इस बात की चिंता है कि यदि कोसी बेराज से पानी नहीं छोड़ा गया तो फिर इस बार वे छठ महापर्व कैसे मनाएंगे? सिंचाई प्रमंडल के प्रभारी कार्यपालक अभियंता सचिन कुमार का कहना है कि कोसी-मैची परियोजना के तहत नहर की सफाई हो रही है। इसलिए इस बार कम ही उम्म्मीद है कि बेराज से पानी छोड़ा जाएगा।

इस नहर पर निर्भर रहने वाले छठव्रतियों के लिए यह सूचना वज्रपात से कम नहीं है। यहां बता दें कि केवल अररिया शहर में गोढ़ी चौक नहर घाट से लेकर स्टेशन रोड घाट तक चार किमी में दोनो ओर हजारों श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं। बेराज से पानी नहीं आने पर क्या होगा। शहर के 80 प्रतिशत छठव्रती इसी नहर में मां छठी की पूजा कर भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। ऐसे में उन्हें किस तरह परेशानी होगी, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है।इधर एबीसी कोसी नहर की दुर्दशा को लेकर सामाजिक संगठन सीमांचल युवा जागरण मोर्चा अररिया ने कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद अररिया को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि इस गंदगी मे लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कैसे मनाया जाएगा। मोर्चा अध्यक्ष गगन कुमार झा ने पत्र में लिखा है कि जिला मुख्यालय में एकमात्र एबीसी कोसी नहर गुजराती है जिस पर मुख्यालय के कई वार्डो के वार्ड वासी लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा मनाते आ रहे हैं किंतु नगरीय क्षेत्र होने के बावजूद उक्त नहर के दोनों छोड़ की घाटों का पक्कीकरण नहीं किया गया है और ना ही नहर की साफ सफाई पर नगर परिषद या सिंचाई विभाग सक्रिय रहती है अभी नहर की दुर्दशा यह है कि चारों तरफ कचरा भरा हुआ है इस गंदगी में जमे हुए पानी इतनी दुर्गंध दे रही है इससे कई तरह की बीमारियां फैलने की संभावना बनी हुई है इसलिए समय रहते पूजा से सप्ताह पूर्व नहर की पूर्ण साफ सफाई कर नए सिरे से पानी छोड़ने की आवश्यकता है जिससे छठव्रतियों को किसी तरह की नुकसान ना हो । मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि नप के ईओ अधिकारियों के साथ पहल करते हुए छठव्रतियों की समस्याओं को दूर करे।

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