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पसमांदा मुस्लिम समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने संभल की घटना को लेकर सरकार और न्यायालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की अनदेखी की जा रही है, जो धार्मिक स्थलों पर विवाद रोकने के लिए बनाया गया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और न्यायालय मिलकर इस कानून को लागू करने में असफल हो रहे हैं, जो संविधान विरोधी कृत्य है. मंसूरी ने संभल की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वहां निहत्थे लोगों पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसके वीडियो प्रमाण मौजूद हैं.
कोर्ट और सरकार पर आरोप
उन्होंने सवाल उठाया कि बहराइच में जब दंगाई एक मुस्लिम परिवार के घर में घुसकर उपद्रव कर रहे थे, तब पुलिस ने गोलियां क्यों नहीं चलाईं? उन्होंने कहा कि देश में संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का काम कोई और नहीं, बल्कि सरकार और न्यायालय कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका भी सरकार के प्रभाव में आकर निष्पक्षता छोड़ चुकी है.
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मंसूरी ने देश के सभी संवेदनशील नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे संविधान की रक्षा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट हों. उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है.
संभल में भड़क गई थी हिंसा
आपको बता दें कि संभल में अदालत के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किए जाने के दौरान 24 नवंबर को हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और अनेक अन्य घायल हो गए थे. सर्वेक्षण का आदेश एक याचिका पर दिया गया था जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद स्थल पर कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था.
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