Amazon का विरोध, 30000 लोगों की छंटनी, लेकिन AI पर कंपनी खर्च कर रही है 30 लाख करोड़ रुपये – AajTak

Feedback
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है.
यह भी पढ़ें: AI के खिलाफ दुनिया भर में बगावत! अमेरिका-कनाडा में सड़कों पर हो रहा विरोध, कई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स कैंसिल
अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है.
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है.
इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है.
दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं.
लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है.
यह भी पढ़ें: Meta ने कर दिया खेल, WhatsApp के लिए भी देने होंगे पैसे!
हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा.
Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है.
यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है.
आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News