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News Desk : रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत का रुख एक बार फिर सामने आया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा आपूर्ति और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ के असर पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, जयशंकर ने सांसदों को बताया कि रूस भारत के ऊर्जा मिश्रण का हिस्सा बना रहेगा और बाहरी दबाव के बावजूद मॉस्को के साथ संबंध बनाए रखना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
बैठक में भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता भी चर्चा का विषय रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत बताई गई। पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बीच रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। बैठक में यह भी बताया गया कि यूक्रेन युद्ध के बावजूद कुछ यूरोपीय देश भी रूस से अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक हिस्सा पूरा कर रहे हैं। इसी संदर्भ में अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के संभावित असर पर सांसदों ने सवाल उठाए।
जयशंकर ने बैठक के बाद भारत-रूस संबंधों को बहुआयामी बताया। उन्होंने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को दोनों देशों के रिश्तों का हिस्सा बताया। यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने के अपने रुख को भी दोहराया। इससे पहले अमेरिका के नए प्रतिबंध कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिला है। भारत ने इस मुद्दे पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
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