Feedback
CBSE) कक्षा 12वीं के परिणाम के बाद रीइवैल्यूएशन और आंसर शीट्स की स्कैन कॉपी पाने के लिए परेशान हो रहे लाखों छात्रों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है. पोर्टल पर लगातार आ रही तकनीकी लापरवाहियों और पेमेंट गेटवे के बार-बार फेल होने से मचे चौतरफा बवाल के बाद अब खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कमान संभाल ली है. शिक्षा मंत्री ने इस पूरी अव्यवस्था को सिरे से दुरुस्त करने के लिए आज देश के चार सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक की है.
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीबीएसई के पुराने और जर्जर हो चुके पेमेंट गेटवे सिस्टम की पूरी प्रणाली को पूरी तरह से ओवरहॉल (बदलना) करना है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े.
इन 4 सरकारी बैंकों को सौंप दी गई ज़िम्मेदारी
शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस आपातकालीन बैठक में देश के चार प्रमुख सरकारी बैंकों के आला अधिकारी शामिल हुए, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), केनरा बैंक और इंडियन बैंक के नाम हैं.
बैठक के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि छात्रों के लिए एक बेहद मजबूत, विश्वसनीय और ‘स्टूडेंट-फ्रेंडली’ पेमेंट इकोसिस्टम तैयार करना बैंकों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. विशेष रूप से परीक्षा के बाद की सेवाओं, जैसे कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त करना और अन्य शुल्क-आधारित डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया को पूरी तरह बुलेट-प्रूफ बनाया जाए.
अब खुद-ब-खुद वापस आएगा फंसा हुआ पैसा
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन चारों बैंकों को सीधे निर्देश दिए हैं कि वे सीबीएसई की तकनीकी टीम के साथ मिलकर काम करें और एक ऐसा मजबूत पेमेंट प्रोटोकॉल स्थापित करें जिससे सभी ट्रांजैक्शंस समय पर पूरे हों. उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी छात्र का पेमेंट फेल होता है या गलती से अतिरिक्त पैसे कट जाते हैं, तो उसका ‘ऑटोमैटिक रिफंड’ (तुरंत पैसा वापस आने की व्यवस्था) होना अनिवार्य है. इसके साथ ही भुगतान से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और एक फास्ट-ट्रैक शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) बनाने को कहा गया है.
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से इस पूरी मुहिम को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’देने की अपील की है, ताकि भविष्य में किसी भी मेधावी छात्र को ऐसी तकनीकी गड़बड़ियों या पेमेंट फेलियर जैसी मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े. बैठक में शामिल चारों बैंकों ने भी सरकार को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है और सीबीएसई के साथ मिलकर जल्द से जल्द इस तकनीकी अपग्रेड को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है.
24 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी हो चुकी है मंत्रणा
इस पूरी सरकारी कवायद के पीछे की एक और बड़ी इनसाइड स्टोरी सामने आई है. दरअसल, आज की इस बैठक से ठीक पहले, यानी 24 मई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस संकट की गंभीरता को देखते हुए देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी एक लंबी और विस्तृत चर्चा की थी.
इस मुलाकात में सीबीएसई के परिणाम के बाद रीइवैल्यूएशन की प्रक्रिया में छात्रों द्वारा झेली जा रही पेमेंट की दिक्कतों और तकनीकी खामियों पर गहन मंथन हुआ था, जिसका परिणाम आज इन 4 बड़े बैंकों की इस महा-बैठक के रूप में देश के सामने आया है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू