रायपुर। 06 नवंबर 2026| सरकार की सख्ती और मिले निर्देश के बाद अब पटवारियों से बस्ता लेने की प्रशासकीय प्रक्रिया शुरू हो गई है। पटवारियों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि वे अपना बस्ता संबंधित आरआई को सौंप दें। हड़ताल के दौरान अब आरआई पटवारियों का भी कामकाज करेंगे।
राज्य शासन के निर्देश के बाद अब प्रदेश के जिलों में यह कार्रवाई हो गई है। सारंगढ़ तहसील में राजस्व निरीक्षकों को पटवारी हलकों की जिम्मेंदारी सौंपी गई है।
हड़ताल से राजस्व के काम हो रहे प्रभावित
पटवारियों की हड़ताल से जमीन की खरीदी-बिक्री के साथ ही नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, खसरा-बी-1 में सुधार और जमीन संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए जरूरी प्रतिवेदन तैयार कराने में भी लोगों को परेशानी हो रही है। सबसे बड़ी दिक्कत समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को हो रही है। किसानों की फसल गिरदावरी, जमीन विवादों की जांच और मौके पर जाकर जाकर रिपोर्ट तैयार करने का काम भी प्रभावित हो रहा है। इससे आम लोगों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
हड़ताली पटवारियों को अपने हलका का बस्ता संबंधित राजस्व निरीक्षक के पास जमा कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। हड़ताल से ग्रामीण इलाकों में नामांतरण, सीमांकन और आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम पूरी तरह ठप हैं।
एक हजार को ब्रेक इन सर्विस का नोटिस, 150 सस्पेंड, काम पर लौटने की चेतावनी
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी-बिक्री की उलटी गिनती के बाद पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। आंदोलन खत्म करने को राजी नहीं हैं। पटवारियों और राज्य सरकार के बीच गतिरोध जारी है। इसी बीच सरकार ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। एक हजार से ज्यादा पटवारियों को ब्रेक इन सर्विस की चेतावनी के बीच 150 से ज्यादा पटवारियों को निलंबित कर दिया है।
बता दें, 13 अक्टूबर से प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। राज्य सरकार ने पटवारियों को काम पर लौटने और स्पष्टीकरण देने के लिए बिलासपुर के 259 और सरगुजा संभाग के 819 सहित प्रदेशभर में 1,000 से ज्यादा पटवारियों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि तय समय में न लौटने पर अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इधर, पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप का कहना है कि पीवी ऐप की खामियां दूर करने, वेतन विसंगति और आरआई पद पर पदोन्नति की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पटवारियों के हड़ताल से डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, एग्रीस्टैक, किसान अभिलेख सत्यापन, नामांतरण-बंटवारा और धान खरीदी की तैयारियां ठप पड़ गई है। इससे समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले उन किसानों की परेशानी बढ़ गई है जिनके खेतों का सर्वे नहीं हो पाया है। जाहिर है ऐसे किसान समितियों में धान नहीं बेच पाएंगे।
फेडरेशन का सुझाव: हड़ताली पटवारियों से बातचीत करे राज्य सरकार
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने पटवारियों की लंबित मांगों का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से तत्काल हस्तक्षेप कर पीवी एप की तकनीकी समस्याएं, वेतन विसंगति को दूर करने के साथ ही प्रमोशन करना और पीवी एप को स्थगित करना है।
कमल वर्मा ने कहा कि पटवारियों के स्थानांतरण, कारण बताओ नोटिस और निलंबन जैसी कार्रवाई की जा रही है। सरकार पटवारियों से बातचीत कर उनकी समस्या का समाधान करे।
जानिए पीवी एप में क्या है तकनीकी दिक्कतें, पटवारी क्यों कर रहे विरोध
छत्तीसगढ़ के सभी पटवारी मुख्य रूप से पीवी एप Physicial Verification का विरोध कर रहे हैं। इस नए डिजिटल सिस्टम को खेतों में बोई गई फसलों के भौतिक सत्यापन (गिरदावरी या डिजिटल क्रॉप सर्वे) के लिए अनिवार्य किया गया है।
पटवारियों का कहना है, इसमें गंभीर तकनीकी खामियां हैं। बार-बार सर्वर डाउन होता है। डेटा अपलोड करने में घंटों का समय बर्बाद होता है। गांवों और सुदूर अंचलों खासतौर पर खेतों के बीच मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की वजह से एप ठीक से काम नहीं करता है।
पटवारी संघ का आरोप है कि सरकार ने पुराने ऑनलाइन “भुइयां” प्लेटफॉर्म को बंद कर अचानक यह नया पीवीएपी लांच किया है। इस एप में पॉलीगॉन मैपिंग (भौगोलिक सीमाओं का डिजिटल सीमांकन) जैसे जटिल तकनीकी काम शामिल हैं। इसके लिए पटवारियों को ट्रेनिंग तक नहीं दी गई है। खेतों में मौके पर जाकर इस तरह से इंट्री करना बेहद कठिन और अव्यवहारिक है। उनका कहना है कि उनके पास पहले से ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, स्वामित्व योजना और अन्य कई सरकारी योजनाओं के काम हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से दोषपूर्ण एप से कम समय में शत-प्रतिशत सत्यापन पूरा करने का दबाव के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।