देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) ने एक समझौता किया है। इस समझौते पर सीआईएसएफ मुख्यालय नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इससे भविष्य में नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे संस्थानों की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी।
नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ यूनिट नरौरा के अधिकारियों ने बताया कि सीआईएसएफ देशभर में 370 से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है। इनमें विमानन, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे संस्थान शामिल हैं।
इस समझौते के तहत, आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा। एमओयू के तहत काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती, संदिग्ध ड्रोन की फोरेंसिक जांच, संयुक्त अभ्यास, रेड-टीमिंग और खास ट्रेनिंग प्रोग्राम पर काम होगा। सीआईएसएफ के मुताबिक, अब तक 3,000 से ज्यादा कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। करीब 80 यूनिटों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
इस समझौते पर सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी. डी. नायक (डीआईजी और प्रिंसिपल, एमपीआरटीसी बहरोड़) और डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर सुरक्षा बल के बड़े अधिकारी सुधीर कुमार (एडीजी, उत्तर) और विजय भी मौजूद थे।
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