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सीएनआर राव (CNR Rao) का पूरा नाम चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव है. वे वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से सॉलिड-स्टेट और स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री के क्षेत्र में काम किया है. उन्हें दुनिया भर के 88 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली है और 1,800 से ज्यादा रिसर्च पब्लिकेशन और 58 किताबें लिखी हैं. भारत रत्न वे एक ऐसे वैज्ञानिक के तौर पर जाने जाते हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार को छोड़कर लगभग सभी संभव पुरस्कार जीते हैं.
साल 2026 में राव को कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान एक नोटिस जारी किया गया. यह नोटिस एक ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा उनके नाम में गड़बड़ी की पहचान किए जाने के बाद भेजा गया था.
सीएनआर राव का जन्म 30 जून 1934 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था. उनके पिता हनुमंता नागेसा राव स्कूलों के निरीक्षक थे और उनकी मां का नाम नागम्मा नागेसा राव था. सी.एन.आर. राव अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे.
राव की शुरुआती पढ़ाई घर पर हुई. उनकी मां ने उन्हें गणित और भारतीय साहित्य की शिक्षा दी, जबकि उनके पिता ने अंग्रेजी सीखने में मदद की. वर्ष 1940 में उन्होंने स्कूल की पढ़ाई शुरू की. उन्होंने बेंगलुरु के आचार्य पाठशाला हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की. इसी दौरान रसायन विज्ञान में उनकी रुचि विकसित हुई.
उन्होंने वर्ष 1951 में मैसूर विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की. उस समय उनकी उम्र 17 वर्ष थी. इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 1953 में उन्हें पीएचडी के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से छात्रवृत्ति मिली. अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज से भी उन्हें पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की पेशकश हुई. उन्होंने पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और वर्ष 1958 में पीएचडी पूरी की.
सी.एन.आर. राव का वैज्ञानिक काम मुख्य रूप से ठोस-अवस्था रसायन विज्ञान और संरचनात्मक रसायन विज्ञान से जुड़ा रहा है. उन्होंने पदार्थों की संरचना, उनके गुणों और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं पर व्यापक शोध किया. वर्ष 1954 में उनका पहला शोध पत्र प्रकाशित हुआ था.
वर्ष 1959 में उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान में अध्यापन का काम शुरू किया. इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में भी काम किया और बाद में भारतीय विज्ञान संस्थान लौट आए. वर्ष 1984 से 1994 तक उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक के रूप में कार्य किया.
सी.एन.आर. राव जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च की स्थापना से भी जुड़े रहे. उन्होंने इंटरनेशनल सेंटर फॉर मैटेरियल्स साइंस की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे भारत के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने वर्ष 1985 से 1989 और फिर वर्ष 2005 से 2014 तक इस जिम्मेदारी को संभाला.
उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले. भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और पद्म विभूषण से सम्मानित किया. वर्ष 2013 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के लिए चुना गया. 4 फरवरी 2014 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में भारत रत्न प्रदान किया.
सी.एन.आर. राव ने अपने वैज्ञानिक जीवन में 1,800 से अधिक शोध पत्र और 58 पुस्तकें लिखी हैं. उन्हें दुनिया भर की 88 यूनिवर्सिटीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधियां भी मिली हैं.
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