Cobra Capital of India: भारत का वो गांव, जहां जहरीले सांप हैं सबसे ज्यादा, जानिए कैसे रहते हैं लोग! – News18 Hindi

Cobra Capital of India: भारत में सांपों को पूजा जाता है. लेकिन वे उतने ही ज्यादा डराते भी हैं. अगर हमारी आंखों के सामने कोई सांप आ जाता है, तो हालत खराब हो जाती है. कई बार तो लोग डर की वजह से उन सांपों को मार भी देते हैं. लेकिन ये सांप प्रकृति के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हैं. आज हम आपको भारत के उस गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे कोबरा कैपिटल ऑफ इंडिया यानी भारत की कोबरा सांपों की राजधानी कहा जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन बता दें कि यह सांपों की दुनिया का अनोखा ठिकाना है. इतना ही नहीं, इन सांपों के बीच ही यहां के लोग रहते हैं. पश्चिमी घाट की हरी-भरी वादियों में बसा यह गांव किंग कोबरा और जैव विविधता का खजाना है. यहां का अगुंबे रेनफॉरेस्ट रिसर्च स्टेशन इन सांपों की जिंदगी को समझने में जुटा है.
कर्नाटक के पश्चिमी घाट में बसा अगुंबे सिर्फ 3 वर्ग किलोमीटर में फैला एक छोटा सा गांव है, जो करीब 2,700 फीट की ऊंचाई पर है. इसे ‘दक्षिण का चेरापूंजी’ भी कहते हैं, क्योंकि यहां बारिश खूब होती है. सिर्फ 600 लोगों का यह गांव पहाड़ों, घने जंगलों और झरनों से घिरा है, जो प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए स्वर्ग है. अगुंबे की खासियत इसकी जैव विविधता है, जिसमें दुर्लभ पौधे, फंगस और जानवर शामिल हैं. मेलिओला अगुंबेंसिस और डैक्टाइलरिया अगुंबेंसिस जैसे फंगस का नाम भी इसी गांव के नाम पर है. अगुंबे में पाए जाने वाले जानवर भी कमाल के हैं. मालाबार ग्लाइडिंग फ्रॉग, मालाबार हॉर्नबिल, मालाबार पिट वाइपर और यहां तक कि काले तेंदुए और अकेले चलने वाले हाथी भी दिखते हैं. मगर इस गांव की सबसे बड़ी पहचान है किंग कोबरा, जो दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप है. इन सांपों के बीच ही यहां के लोगों ने रहना सीख लिया है.
बता दें कि अगुंबे को ‘कोबरा राजधानी’ का तमगा यूं ही नहीं मिला, बल्कि यहां सांपों की आबादी भारत में सबसे ज्यादा है, खासकर किंग कोबरा की. किंग कोबरा इस इलाके का स्टार है और इसकी स्टडी के लिए मशहूर स्नेक एक्सपर्ट रॉमुलस व्हिटेकर ने 2005 में अगुंबे रेनफॉरेस्ट रिसर्च स्टेशन (ARRS) बनाया. यहां भारत का पहला किंग कोबरा रेडियो टेलीमेट्री प्रोजेक्ट शुरू हुआ, जिसमें सांपों की हरकतों को ट्रैक किया जाता है. सांप विशेषज्ञ यानी हर्पेटोलॉजिस्ट सांपों, छिपकलियों और मेंढकों जैसे रेंगने वाले जीवों का अध्ययन करते हैं. ARRS में वैज्ञानिकों ने पाया कि किंग कोबरा जंगल का सबसे बड़ा शिकारी है, जो दूसरे सांपों (जैसे करैत और अन्य कोबरा) को खाता है. इससे सांपों की आबादी नियंत्रित रहती है, साथ ही साथ जंगल का संतुलन बना रहता है.
भारतीय संस्कृति में सांपों का खास स्थान है. भगवान शिव और विष्णु से जुड़े कोबरा को नाग पंचमी जैसे त्योहारों में पूजा जाता है. मगर अगुंबे में सांप सिर्फ पौराणिक नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी जरूरी हैं. किंग कोबरा जंगल में छोटे सांपों को खाकर उनकी संख्या को काबू में रखता है, जिससे बीमारियां और खाने की कमी जैसी समस्याएं नहीं बढ़तीं. अगर ये सांप न हों, तो जंगल का पूरा इकोसिस्टम बिगड़ सकता है. बता दें कि अगुंबे की खूबसूरती और सांपों की दुनिया इसे अनोखा बनाती है. यहां का जंगल न सिर्फ सांपों का घर है, बल्कि ढेर सारे दुर्लभ जीव-जंतुओं को भी पनाह देता है. ARRS जैसे सेंटर सांपों को बचाने और उनके बारे में जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं. मगर सांपों की ज्यादा आबादी की वजह से स्थानीय लोग और वैज्ञानिक दोनों को सावधान रहना पड़ता है. यह गांव हमें सिखाता है कि प्रकृति और उसके जीव कितने जरूरी हैं. अगुंबे का किंग कोबरा न सिर्फ डरावना है, बल्कि जंगल का रक्षक भी है.

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