देहरादून की सहस्त्रधारा रोड पर 26 फरवरी 2026 की शाम उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने हथियार के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है, दोनों के पास से दो लोडेड पिस्टल और सात जिंदा कारतूस बरामद हुए. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर सुनील राठी की गैंग से ताल्लुक रखते हैं.
STF उत्तराखंड की टीम काफी समय से सुनील राठी गैंगपर पैनी नजर बनाए हुए थी. सुनील राठी पौड़ी गढ़वाल जेल में बंद है, लेकिन जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए भी वह अपने गैंग को बाहर से संचालित करता है. हत्या, हत्या का प्रयास और अपहरण समेत उस पर 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं.
विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि सुनील राठी के दो गैंग मेंबर देहरादून में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं और वे सहस्त्रधारा रोड की तरफ जा रहे हैं. उपनिरीक्षक दीप मैठानी अपनी टीम के साथ सरकारी बोलेरो से निकले और सहस्त्रधारा क्षेत्र में मामूर हो गए.
आईटी पार्क चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अर्जुन गुसाईं को फोन पर सतर्क किया गया. वे भी अपनी प्राइवेट कार से आईटी पार्क गेट पर कॉन्स्टेबल रोबिन रमोला के साथ पहुंच गए. दोनों टीमें फारेस्ट चुंगी से करीब आधा किलोमीटर आगे बड़े मोड़ पर एकजुट होकर आपस में सूचनाएं साझा कर ही रही थीं कि मुखबिर ने फिर संपर्क कर के टीम को सतर्क किया.
करीब 2-3 मिनट में ही पैसिफिक गोल्फ स्टेट की तरफ से तेज रफ्तार में एक काले रंग की स्कॉर्पियो आती दिखी. पुलिस ने रास्ता रोक वाहन को घेर लिया. गाड़ी में बैठे दोनों युवक पुलिस को देखते ही खिड़की खोलकर भागने की कोशिश करने लगे, साथ ही पुलिस को इधर-उधर की बातों में उलझाने की कोशिश भी करते रहे.
उपनिरीक्षक अर्जुन गुसाईं ने वीडियोग्राफी शुरू करवाई और दोनों से नाम-पता पूछा. पूछताछ में चालक ने खुद को भानू चौधरी निवासी मील्स व्यू कॉलोनी, सहारनपुर उत्तर प्रदेश, उम्र 22 साल बताया. वहीं दूसरे ने अपना नाम पारस सिंह निवासी प्रेमपुरी, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, उम्र 28 साल बताया है.
अ०उ०नि० मनोज बेनीवाल ने पारस की तलाशी ली तो उसकी जींस की दाहिनी जेब से एक 32 बोर पिस्टल और बाईं जेब की जेब से 3 जिंदा कारतूस निकले. भानू की तलाशी में उसके बाएं सुड्डे से एक और 32 बोर पिस्टल और 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए. दोनों पिस्टलों पर MADE IN USA और AUTO PISTAL लिखा हुआ था ,दोनों चालू हालत में थे और मैगजीन भी लगी हुई थी.
गाड़ी की तलाशी में डेशबोर्ड से दो मोबाइल फोन, 40 हजार रुपये नकद और 500 के नोटों की एक गड्डी मिली. पारस का फोन जब खोला गया तो उसमें फेसटाइम ऐप पर कई लोगों से बातचीत की हिस्ट्री मिली जो जांचकर्ताओं को संदिग्ध लगी.
पूछताछ होने पर पारस ने बताया कि वह 2012 में हत्या के मुकदमे में जेल गया था. वहां से निकलकर वह पहले ‘संजीव जीवा’ नामक गैंगस्टर के सम्पर्क में आया और उसकी मौत के बाद सुनील राठी गैंग से जुड़ गया. पिछले साल वह भानू के साथ दो बार और एक बार अकेले पौड़ी गढ़वाल जेल में सुनील राठी से मिलने भी गया था.
दोनों ने यह भी कबूल किया कि देहरादून में विवादित जमीनों के मामले सुनील राठी के नाम का डर दिखाकर निपटाते थे और उसके बदले मोटी रकम वसूलते थे. उस दिन भी वे एक प्रॉपर्टी डीलर से विवादित जमीन के एवज में पैसे लेने आए थे.
इस मामले में थाना राजपुर में FIR दर्ज की गई है . भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 111(3) 1959 की धारा 3 व 25 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ. जांच उप निरीक्षक दीपक देवाड़ी को सौंपी गई है. दोनों अभियुक्तों को मय बरामद हथियारों के थाना राजपुर लाया गया, जहां उनसे आपराधिक गतिविधियों के बारे में विस्तृत पूछताछ जारी है.
आलोक सेमवाल उत्तराखंड के देहरादून की खबरों पर नजर रखते हैं. एबीपी लाइव के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन BA hons मास कम्यूनिकेशन HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की हैं.
Source: IOCL
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